Tuesday, July 5, 2022

काम को मिला इनाम : सबसे ज्यादा मत पाने वाले अमन अरोड़ा को मिली मंत्रिमंडल में जगह

विधानसभा हलका सुनाम से दो मर्तबा विधानसभा चुनाव जीतने वाले अमन अरोड़ा को आखिरकार पंजाब मंत्रिमंडल में जगह मिल ही गई। इस बार उन्होंने चुनाव 75,277 मतों से जीता जो पंजाब के लिहाज से सबसे बड़ी जीत है। हालिया संगरूर उपसंसदीय चुनाव में करारी शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान नीत आम आदमी पार्टी सरकार में इसी सुनाम के रास्ते किया गया यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार है जो संसदीय हलका संगरूर में ही आता है।

इसके साथ ही अब संगरूर संसदीय हलके से पंजाब मंत्रिमंडल में कबीना मंत्री का पद पाने वाले अमन अरोड़ा तीसरे ऐसे मंत्री हो गए हैं, जहां मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा हरपाल सिंह चीमा और गुरमीत सिंह मीत हायर पहले से मौजूद हैं। दरअसल, 47 वर्षीय अमन अरोड़ा का संबंध वैसे भी राजनीतिक घराने से ही रहा है और वह स्वयं भी पहले कांग्रेस में ही होते थे। उनके पिता दिवंगत भगवान दास अरोड़ा भी सुनाम से ही दो बार- यानी1992 और फिर1997 में निर्वाचित विधायक रहे।

जब शिरोमणि अकाली दल- शिअद बादल ने सन् 1992 के पंजाब विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था तब भी अरोड़ा मंत्री रहे थे। हालांकि, वर्ष 2000 में उनका देहांत हो गया था और उसके बाद अमन अरोड़ा का 25 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश हुआ। वर्ष 2007 और वर्ष 2012 में भी उन्होंने कांग्रेस टिकट पर अपना विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए। किसी समय कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी माने जाते अमन अरोड़ा ने अंतत: कांग्रेस छोड़ दी और वर्ष 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ही वर्ष 2016 में आम आदमी पार्टी- आप का दामन थाम लिया।

अमन ने कहा था कि उन्हें आप के राष्टÑीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की विचारधारा और उनकी पंजाब की राजनीति में बदलाव लाने के समर्पण ने खूब प्रभावित किया। वर्ष 2017 में अमन अरोड़ा ने हलका सुनाम से अपना विधानसभा चुनाव कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी दमन थिंड बाजवा को 30,307 वोट से हराकर जीता था। बाजवा फिलहाल भाजपा में हैं।

अमन अरोड़ा धनाढ्य व्यक्ति हैं और वर्ष 2017 में उनकी परिसंपत्तियां करीब 65.88 करोड़ रुपए की थीं जबकि उन पर करीब 15 करोड़ रुपए की देनदारियां थीं लेकिन बावजूद इसके वर्ष 2022 में उनकी परिसंपत्तियां बढ़कर 95.12 करोड़ रुपए जबकि देनदारियां 20 करोड़ रुपए हो गर्इं थीं। उनका सुनाम में ही एक चेरिटेबल अस्पताल भी चल रहा है, जबकि उनका सुनाम स्थित विधायक कार्यालय जनता की रोजमर्रा की दुश्वारियों का निवारण कराने में जुटा रहता है।

सुनाम इलाके में कार्यरत एक सरकारी स्कूल में शिक्षक का कहना है, अमन अरोड़ा का उनकी पार्टी की वजह से तो जो रसूख है वह है ही, उसके अलावा उनकी अपनी साख भी बेजोड़ है और यही वजह है कि उन्हें इस बार पंजाब विधानसभा चुनाव में हलके ही जनता से भारी अंतर से विधानसभा में पहुंचाया।

अमन अरोड़ा दरअसल पंजाब विश्वविद्यालय- चंडीगढ़ से स्नातक हैं। उन्हें वर्ष 2017 में आप पंजाब का सह संयोजक नियुक्त किया गया था लेकिन उन्होंने वर्ष 2019 में अपने इस पद से इस्तीफा दे दिया था जब शिरोमणि अकाली दल- शिअद बादल नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया की ओर से आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के ऊपर ठोंके गए एक मानहानि के मामले में केजरीवाल को उनसे माफी मांगनी पड़ी थी। जो भी हो, अमन अरोड़ा को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार समिति के प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई थी जब पंजाब में केवल भगवंत मान ही संगरूर संसदीय हलके से निर्वाचित होने वाले आप के एकमात्र सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे थे।

हलका सुनाम के एक वोटर का कहना है, वैसे अमन अरोड़ा जब विपक्ष में थे तब भी वह बड़े मुखर रहे। सुनामवासी उन्हें और उनके पिता को बड़े अच्छे से जानते हैं और हमें उम्मीद है कि मंत्री बनने के बाद भी वे पहले की तरह जनता के बीच बने रहेंगे। उम्मीद है कि वे हलके का चहुंमुखी विकास कराने में सक्षम होंगे।



From: Jansatta

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