कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री को विदाई जीत से। पर ट्वेंटी20 विश्व कप में टीम इंडिया की नाकामी दोनों को चुभेगी। इस विफलता से विराट कोहली की कप्तानी में आइसीसी ट्राफी का इंतजार और बढ़ गया। क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में तो सफल होने के लिए यह उनके लिए आखिरी मौका था। इस विश्व कप के बाद टी20 की कप्तानी छोड़ने का ऐलान वे पहले ही कर चुके थे। कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल काफी शानदार रहा। पर विदाई जैसी मिली चाहिए थी, नहीं मिल पाई। खिताबी सपना मन में ही रह गया।
सपने को साकार करने के लिए पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की सेवाएं भी मेंटर के तौर पर ली गईं। पर उनकी मौजूदगी भी टीम का भाग्य नहीं बदल पाई। खिताब की प्रबल दावेदार के रूप में उतरी टीम इंडिया पहली दो परीक्षा में ही लड़खड़ा गई। पाकिस्तान और न्यूजीलैंड ने आसान जीत से भारतीय टीम की प्रतिष्ठा पर चोट लगाई।
हार-जीत खेल का हिस्सा है। लेकिन जिस अंदाज में टीम इंडिया ने पाक और न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच हारे, वह हैरत भरा था। आइपीएल के जरिए दुनिया के स्टार खिलाड़ियों को अनुभव दिलाने और आर्थिक मजबूती देने वाला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी इस फॉरमेट में अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन से मायूस होगा। चंद सप्ताह पहले ही जिन मैदानों पर खेलने का लाभ भारतीय खिलाड़ियों ने उठाया, उन्हीं पर उनका खेल निराश करने वाला रहा। आइपीएल के दूसरे चरण की थकान को बहाना नहीं बनाया जा सकता क्योंकि दूसरे देशों के स्टार खिलाड़ी भी इसमें खेले।
वजह कोई भी रही हो, जो हो गया सो हो गया। अब 2022 में आॅस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप है। दो साल में आइसीसी के तीन महत्त्वपूर्ण टूर्नामेंट हैं। इसके लिए नए सिरे से सोचना होगा। अब कप्तान तो बदलेगा ही, कोच भी नया होगा। इस बदलाव का टीम पर थोड़ा असर पड़ सकता है। टी20 की कप्तानी रोहित शर्मा को सौंप दी गई है। रोहित आइपीएल के सबसे सफल कप्तान हैं। उन्होंने मुंबई इंडियंस को पांच बार चैंपियन बनाया है। विराट हट जरूर गए हैं पर अपने आक्रामक अंदाज से उन्होंने 50 मैचों में कप्तानी करते हुए टीम को 32 मैचों में जीत दिलाई और 16 हारे। उनकी सफलता का फीसद रहा 66.67 जो खराब नहीं माना जा सकता। यूं विराट ने कह दिया है कि वे मैदान पर अपने अनुभव को साझा करते रहेंगे।
नए कप्तान और कोच का टैस्ट भी जल्द होगा। टी20 विश्व कप के चंद रोज बाद ही न्यूजीलैंड की टीम भारतीय दौरे पर होगी। तीन टी20 और दो टैस्ट खेले जाने हैं। आइसीसी टूर्नामेंटों में न्यूजीलैंड भारत की राह में बाधा बनता रहा है, इसलिए हिसाब बराबर करने का भी मौका है। मुख्य कोच राहुल द्रविड़ होंगे। क्रिकेट जगत में उन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है। उन्होंने दुनिया भर की पिचों पर तेज और स्पिन गेंदबाजों को बखूबी झेला है।
दबाव में खेलने का उनका कौशल और अनुभव टीम इंडिया के काफी काम आ सकता है। मौजूदा टीम के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनको तैयार करने में राहुल की भूमिका रही है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अंडर-19 और इंडिया कई खिलाड़ियों को निखारा है। नेशनल क्रिकेट अकादमी के प्रमुख के तौर पर उन्होंने प्रतिभाओं को तराशा है। वह खिलाड़ियों की मानसिकता से भली-भांति परिचित हैं। उन्हें मालूम है कि इन खिलाड़ियों में खेल सुधार की ललक है, नई ऊंचाइयों को छूने का जोश भी।
यह भारतीय क्रिकेट में बदलाव का दौर है। पिछली सफलतातों के सिलसिले को जारी रखने की चुनौती राहुल द्रविड़ के कंधों पर होगी। अपने खेल जीवन में उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना किया है। इस कसौटी पर भी वे खरे उतरेंगे, उम्मीद कर सकते हैं। हमें प्राथमिकता तय करनी होगी। आइपीएल या आइसीसी स्पर्धाएं।
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From: Jansatta
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