अगर कोई आय से दलित, पिछड़ा आदि है, तो उसके बालिग बच्चों को स्वत: दलित, पिछड़ा आदि मान लेना अनुचित है। अगर कोई पेशे से कुम्हार, शिक्षक, नाई, मोची आदि है तो उसके बालिग बच्चों को स्वत: कुम्हार, शिक्षक, नाई, मोची आदि मान लेना अनुचित है।
अगर कोई धर्म से ईसाई, मुसलिम, सिख, हिंदू आदि है, तो उसके बच्चों को स्वत: ईसाई, मुसलिम, सिख, हिंदू आदि मान लेना अनुचित है। पिता की पीड़ा बच्चों तक स्थानांतरित करना अनुचित है। हर बालिग को अपना समूह, जीवन साथी, देश, धर्म, निवास, पेशा, शिक्षा, उपनाम आदि चुनने, बताने का सरल सहज अधिकार होना चाहिए। किसी को किसी पर अपनी सोच नहीं लादनी चाहिए।
’जीवन कुमार मित्तल, नई दिल्ली
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