किसी भी धर्म का पर्याय समाज में सद्भाव और उन्नति ही होता है, लेकिन जब धर्म का इस्तेमाल सत्ता और साम्राज्य स्थापित करने के लिए किया जाता है तो वह कट््टरता की तरफ बढ़ता है। कट््टरता एक अंधा कुआं है, जिसका कोई अंत नहीं है। आज पूरे विश्व में आतंकवाद का कारण भी धार्मिक कट््टरता ही है। फ्रांस में कार्टूनिस्ट की हत्या, अफगानिस्तान में महिलाओं पर अत्याचार, भारत और अन्य देशों में सक्रिय धर्म परिवर्तन करने वाले समूह, हरियाणा के सिंघू बांर्डर पर की गई हत्या, इन सभी का कारण धार्मिक कट््टरता ही है।
इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर हमले हैं, जो कि एक झूठी अफवाह से शुरू हुआ और पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए आतंक का पर्याय बन गया, जिसको रोकना सरकार के लिए भी कठिन हो रहा है। कई लोग मारे जा चुके हंै, सैकड़ों बेघर होकर देश छोड़ने को तैयार हैं, जिसका मूल कारण फैलाई गई अफवाह नहीं, बल्कि धार्मिक कट््टरता ही है, जो कि पूरे विश्व की शांति और मानवता के लिए बड़ा खतरा है।
मानवता के लिए स्थापित किए गए धर्म का प्रयोग मानव की ही हत्या के लिए किया जाए तो अगर कहीं से धर्म के संस्थापक अपने अनुयाइयों को इस तरह के जघन्य कृत्य करते देख रहे होगें तो निश्चित ही उनके मन में भी अपराधबोध होता होगा।
’सुनील विद्यार्थी, मोदीपुरम, मेरठ
पैकेटबंद भोजन
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैकेट बंद भोजन का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। बच्चे विशेष रूप से पैकेट बंद खाद सामग्री के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। यह उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। इन खाद्य पदार्थों की वजह से बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है। बड़े होने पर उन बच्चों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
बच्चे देश का भविष्य हैं। देश के बेहतर भविष्य के लिए बच्चों का स्वस्थ रहना सबसे जरूरी है। सरकार उन समस्याओं पर आंख बंद किए हुए है। उन पैकेट बंद खाद्य सामग्रियों में वसा, चीनी और नमक की मात्रा अनियमित रूप से मिलाई जाती है, जो बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदेह है। सरकार को कानून बना कर सभी पैकेट बंद खाद्य सामग्रियों पर वसा, नमक, चीनी एवं अन्य सामग्रियों की मात्रा का विवरण पैकेट पर उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि अभिभावक गण खरीदने से पहले यह जान सकें कि इन खाद्य सामग्रियों में कौन-सी मात्रा किस अनुपात में मिलाई गई है। पैकेटबंद खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता पर सरकार को निगरानी रखनी चाहिए।
’हिमांशु शेखर, केसपा, गया
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