Friday, September 10, 2021

चुनाव से पहले तेज हुई सियासी हलचल

उम्मीदों का प्रचार
हिमाचल में तीन विधानसभा हलकों और एक संसदीय हलके के उप-चुनावों को लेकर कांग्रेस ने जमकर प्रचार छेड़ रखा था। अभी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं हुई है। कांग्रेस को उम्मीद थी कि सितंबर के आखिर या अक्तूबर में प्रदेश में चुनाव हो जाएंगे। कांग्रेस के प्रत्याशी लगभग तय ही हैं।

चुनाव आयोग ने फरमान सुना दिया कि त्योहारों के बाद तक उप-चुनाव टाल दिए गए हैं। इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशियों को गुस्सा तो आना ही था। उनकी राजनीतिक गणना बिगड़ गई और प्रचार भी लंबा खिंच गया। लेकिन कठघरे में जयराम सरकार भी आ गई। जनता में संदेश चला गया कि सरकार चुनाव से भाग खड़ी हुई है और उसे हार का डर है।

ऐसे में कुछ समय उसे और मिल जाए इसलिए चुनाव टाल दिए गए हैं। सरकार के सामने मुश्किल है कि अगर चुनाव देरी से हुए तो मंडी संसदीय हलके में बर्फबारी का भी अंदेशा है। ऐसे में वह अगर चुनाव कराती है तो हार का खतरा है और नहीं कराती है तो बर्फबारी का खतरा है। दोनों ही स्थितियों में जयराम सरकार व भाजपा पसोपेश में है कि क्या करे।

ऐसे में भाजपाइयों व मुख्यमंत्री जयराम सरकार प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे के सहारे अपनी राजनीतिक नैया पार लगाने में जुटी ही हुई है। पिछले दिनों पात्र आबादी को सौ फीसद टीकारकण के मौके पर मोदी ने प्रदेश की जनता से संवाद किया और अब प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत वह 29 सितंबर को दोबारा से प्रदेश की जनता से रूबरू होने वाले हैं।
पता नहीं प्रधानमंत्री को प्रदेश की जनता से बार-बार रूबरू कराने से भाजपा को इन उपचुनावों में कितना लाभ मिलेगा। लेकिन कांग्रेस को मुद्दा जरूर मिल जाएगा कि जनता से प्रधानमंत्री रूबरू तो होते रहते हैं लेकिन प्रदेश के लिए कुछ देते तो हैं नहीं।

कांग्रेस के बीज
उत्तराखंड भाजपा में आजकल कांग्रेस छोड़कर पार्टी में आए मंत्रियों और विधायकों के खेमे ने भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले दिनों भाजपा के देहरादून जिले के रायपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमेश शर्मा काऊ की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक कार्यक्रम में धन सिंह रावत से कहासुनी हो गई थी।

उमेश शर्मा काऊ ने धन सिंह रावत को मना किया था कि वे भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में न लाएं। लेकिन धन सिंह रावत कार्यकर्ताओं को लेकर कार्यक्रम में शामिल हुए जिसका विरोध मुख्यमंत्री के सामने उमेश शर्मा काऊ ने किया। यह मामला काऊ दिल्ली भाजपा हाईकमान तक ले गए और कांग्रेस से भाजपा में आए विधायकों और मंत्रियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। यह मामला अब ज्यादा तूल पकड़ रहा है। काऊ के समर्थन में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए विधायक और मंत्री सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और सुबोध उनियाल पक्ष में आकर खड़े हो गए हैं।

उधर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने भाजपा हाईकमान को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि भाजपा में कांग्रेस छोड़कर शामिल हुए थे तब उनका बहुत सम्मान किया गया था और अब वे पिछले चार साल से अपमान के घूंट पी रहे। उन्होंने कहा कि हम सब उमेश शर्मा काऊ के साथ खड़े हैं और काऊ अकेले नहीं हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान के एक बड़े नेता के संपर्क में भाजपा विधायक और कांग्रेस गोत्र के उमेश शर्मा काऊ और कैबिनेट मंत्री कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए विधायक और मंत्री अब एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं। जिससे भाजपा के सामने राजनीतिक संकट पैदा हो रहा है। उमेश शर्मा काऊ पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खासम खास हैं। विजय बहुगुणा भी भाजपा में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। इस पर हरीश रावत ने कहा कि भाजपा ने बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से खाए वाली कहावत सिद्ध की है।

दिवास्वप्न
उत्तरा बसपा प्रमुख मायावती वर्तमान में किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को महज 19 सीट मिली थी। यह संख्या एक राज्यसभा सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं थी। पिछला लोकसभा चुनाव उन्होंने खुद लड़ा नहीं। हालांकि उन्हें 2014 के शून्य की जगह सपा के साथ गठबंधन के कारण 2019 में दस सीटों पर कामयाबी मिल गई थी। इसके बावजूद सपा से अपना गठबंधन तोड़ दिया था। अब चुनाव सामने देख सक्रिय हुई हैं। कहा कि इस बार सरकार बनेगी तो मूर्तियां लगाने, संग्रहालय स्थापित करने और स्मारक व पार्क बनाने का एजंडा नहीं होगा। बाहुबलियों और माफिया को टिकट नहीं देने का भी एलान कर दिया है। मऊ के मौजूदा बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को बाहुबली माना जाता है। वे जेल में हैं। उनके भाई अफजल अंसारी गाजीपुर से सांसद हैं। अभी से घोषणा कर दी है कि मऊ में इस बार मुख्तार के बजाय पार्टी के सूबेदार भीम राजभर उम्मीदवार होंगे। अब जबकि चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी उनके वोट बैंक में सेंध लगा रही है, दूसरी तरफ ब्राह्मणों का झुकाव भाजपा की तरफ ज्यादा दिख रहा है तो उनके मुख्यमंत्री बनने की चाह दिवास्वप्न ही लगेगी।

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From: Jansatta

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