Friday, September 17, 2021

सियासी आश्चर्य

जुबानी जंग
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री व कांग्रेसी गोत्र के नेता डाक्टर हरक सिंह रावत ने भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस की हरीश रावत सरकार में रहते हुए तब के मुख्यमंत्री हरीश रावत की बात मान लेते हैं तो त्रिवेंद्र सिंह रावत ढैंचा बीज घोटाले में जेल में होते। उन्होंने तब हरीश रावत की बात नहीं मानकर गलती की। उनके इस बयान से राज्य की राजनीति में फिर से नया तूफान खड़ा हो गया। भाजपा में त्रिवेंद्र सिंह रावत के विरोधी एकजुट हो गए। वहीं त्रिवेंद्र सिंह रावत के समर्थक मदन कौशिक और अन्य नेताओं ने हरक सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोल लिया।

जबकि आश्चर्यजनक बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने हरक सिंह रावत की बात का खंडन करते हुए कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत बीज घोटाले में निर्दोष हैं। जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री थे तब हरीश रावत उनका खुलेआम पक्ष लेते थे और त्रिवेंद्र सिंह रावत भी हरीश रावत को भाजपा के नेताओं से ज्यादा सम्मान देते थे। दोनों की दोस्ती आज भी जगजाहिर है।

आजकल त्रिवेंद्र सिंह रावत राज्य की राजनीति में बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों के इतने दौरे नहीं किए जितने वे मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद कर रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरक सिंह रावत पर तंज कसते हुए कहा कि उनके जैसे सैकड़ों बच्चे राजनीति में घूम रहे हैं। वही हरक सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की जुबानी जंग में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुप्पी साधे हुए हैं।

सबका मालिक एक
गुजरात के प्रयोग से भाजपा में सन्नाटा है। यह एक कंपनी के बल्ब के विज्ञापन की एक पंक्ति की तरह प्रयोग हो रहा, जिसमें घर का मालिक कहता है कि सारे घर के बल्ब बदल डालूंगा। गुजरात में पहली बार के विधायक को मुख्यमंत्री बनाने पर ही हर कोई हैरान था, पर नए बने मंत्रियों की सूची से तो सभी भाजपाई सहम गए हैं। एक भी पुराने मंत्री को मौका नहीं मिला। भूपेंद्र पटेल ने बल्ब के विज्ञापन के अंदाज में सारे मंत्री हटा दिए।

जाहिर है कि यह फैसला दिखावे भर के लिए तो उनका अपना है अन्यथा सब कुछ आलाकमान कर रहा है। गुजरात प्रधानमंत्री का अपना सूबा है। विजय रुपाणी को भी आलाकमान में बैठे लोगों में खास माना जाता है। पर वे आह भी न भर पाए। संदेश साफ है। पार्टी में किसी का भी पद पक्का नहीं है। राज्यपालों के मामले में तो यह नीति पहले ही लागू कर दी गई थी।

एक भी राज्यपाल को पांच साल से ज्यादा का कार्यकाल नहीं मिल पाया। बदलाव का प्रयोग पिछले लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में ही शुरू हो गया था। जहां भाजपा ने सभी 11 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे थे। फायदेमंद साबित हुआ था यह प्रयोग। नौ सीटों पर भाजपा जीत गई थी। अगला बदलाव कर्नाटक में होना था। पर येदियुरप्पा को छेड़ने से पहले महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष के जरिए मुकम्मल होमवर्क करने में वक्त लगा।

लिहाजा पहले उत्तराखंड के त्रिवेंद्र सिंह रावत की छुटटी हुई। फिर असम में सवार्नंद सोनोवाल को बदला गया। अगला निशाना येदियुरप्पा बने और अब गुजरात में तो एकदम अभिनव प्रयोग ही कर दिखाया। केंद्रीय मंत्रिमंडल के पिछले विस्तार में भी रविशंकर प्रसाद, हर्षवर्धन, संतोष गंगवार और प्रकाश जावडेकर जैसे धुरंधरों की छुटटी करके भी एक संदेश दे दिया गया था।

हालांकि सारे मंत्री बदल डालने का यह प्रयोग भाजपा से पहले केरल में पिनाराइ विजयन ने किया था। चर्चा है कि मुख्यमंत्रियों में अब बारी शिवराज चौहान और योगी आदित्यनाथ की आएगी। पर डरे हुए तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा के भाजपा विधायक भी हैं। किसको टिकट मिलेगा और किसकी होगी छुटटी, इसी पहेली में उलझे हैं सब।

दिल्ली दरबार में हाजिरी
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एक हफ्ते के भीतर दो बार आलाकमान की ओर से दिल्ली तलब कर लिए गए। वहीं गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को कुर्सी से एक झटके में नीचे उतार दिया गया। ऐसे में खबर फैल गई कि जयराम को भी मुख्यमंत्री के पद से हटाया जा रहा है। पूरे भाजपा खेमे में सन्नाटा छा चुका था। इस बीच भाजपा के प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने जयराम की तारीफ में कसीदें पढ़ दिए। लेकिन यह नहीं बोला कि जयराम को नहीं हटाया जा रहा और अगले चुनाव उन्हीं की कमान में लड़े जाएंगे। जब जयराम को हटाने की पहले अटकलें चली थी तो उन्होंने कह दिया था कि जयराम को नहीं हटाया जा रहा है।

इस पर पार्टी नेताओं की ओर से उन्हें कई कुछ सुनना पड़ा था। इस बार उन्होंने संयम बरता और आगे नहीं बढ़े। जो बात कही जानी थी वह तो कही नहीं जा सकी। ऐसे में सरकार को आगे किया गया। इसके बाद वन मंत्री राकेश पठानिया का बयान आया कि 2022 के चुनाव भी जयराम के ही नेतृत्व में लड़े जाएंगे। अब उन्हें सलाह मिल रही कि दिल्ली दरबार के क्षेत्राधिकार में न घुसे। मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी अटकलें लग रही है। कहीं ऐसा न हो कि नंबर लग जाए।
(संकलन : मृणाल वल्लरी)

The post सियासी आश्चर्य appeared first on Jansatta.



From: Jansatta

Read Full Post ㅡ https://ift.tt/3hDRoxN

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार...

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार... From: ABP Live Read Full Post ㅡ htt...