Monday, August 23, 2021

भुगतान क्षेत्र : भारत में बढ़ी होड़

वित्तीय तकनीक से जुड़ी कई कंपनियां भारत के भुगतान क्षेत्र में उतरने की योजना बना रही हैं। अब तक 30 कंपनियों ने रिजर्व बैंक में आवेदन किया है। इनें टाटा, रिलायंस, अमेजन, पेटीएम, फोन पे जैसी कंपनियां आमने-सामने हैं। आभासी भुगतान को बढ़ावा देने की योजना पर भारतीय रिजर्व बैंक काम कर रहा है। आभासी भुगतान (डिजिटल पेमेंट) को बढ़ावा देने के लिए आरबीआइ ‘पेमेंट एग्रीगेटर्स’ (पीए) को लाइसेंस दे रहा है। यह लाइसेंस रिजर्व बैंक की गैर बैंकिंग भुगतान नियमन प्रणाली (नॉन बैंक पेमेंट प्रोवाइडर्स रेगुलेटरी सिस्टम) के तहत दिया जा रहा है। रिजर्व बैंक जल्द ही इस नियमन प्रणाली को लागू करेगा।

जिन कंपनियों ने आरबीआइ के पास लाइसेंस के लिए प्रस्ताव जमा कराया है- उनमें टाटा समूह, अमेजन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, डच पेमेंट्स स्टार्टअप एडयेन, पेटीएम, भारतपे, फोनपे, सीसी एवेन्यू, रेजरपे, क्रेड, जोमैटो, पेयू, वर्ल्डलाइन, पाइन लैब्स और कैम्सपे शामिल हैं। 30 कंपनियों ने अपना प्रस्ताव जमा किया है। मौजूदा और नई गैर-बैंक कंपनियों को 30 सितंबर से पहले आवेदन करना है। तब तक आवेदन करने वाली कंपनियों की संख्या और बढ़ सकती है।इसके लिए अधिकृत कंपनियां सीधे आरबीआइ के दायरे में होंगी। माना जा रहा है कि इस कदम से देश में भुगतान क्षेत्र व्यवस्थित तरीके से विनियमित होगा। लंबे समय से भारत में इन ‘पेमेंट एग्रीगेटर्स’ के कामकाम के नियमन के लिए जरूरत बताई जा रही है। रिजर्व बैंक ने इस बारे में दिशानिर्देश मार्च 2020 में जारी किया था। इसमें यह गौरतलब है कि आरबीआइ जिन कंपनियों को मंजूरी देगा, वही कंपनियां व्यापारियों को भुगतान सेवा दे सकती हैं। बैंकों के लिए किसी अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।

कंपनियों को नियमों का सटीक अनुपालन करना होगा। भुगतान की सुरक्षा के वैश्विक स्तरीय नियम बनाने होंगे। कई प्रमुख ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, वैश्विक भुगतान कंपनियां और घरेलू उपभोक्ता कंपनियां भी आवेदन करने के लिए कतार में हैं। आरबीआइ इन प्रस्तावों की जांच के लिए मानदंड तैयार कर रहा है। जांच प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं। आरबीआइ नियमन कंपनियों को अपने संचालन को तभी तक जारी रखने की मंजूरी भी देगा जब तक कि वे संबंधित प्रस्तावों के बारे में अंतिम सूचना नहीं दे देतीं।

जानकारों के मुताबिक, नए दिशानिर्देशों का मकसद भारत में इंटरनेट और ई-कॉमर्स कंपनियों के भुगतान कारोबार पर बेहतर पर्ववेक्षण नियंत्रण का इरादा भी हो सकता है। पेमेंट एग्रीगेटर की मंजूरी पाने के लिए कंपनियों को पहले साल में 15 करोड़ रुपए की नेटवर्थ की जरूरत होगी। दूसरे साल में यह 25 करोड़ रुपए होनी चाहिए। हाल में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई जोमैटो ने स्टॉक एक्सचेंज पर इस मामले में जानकारी दी है कि उसने इस क्षेत्र के लिए अपनी एक सहयोगी कंपनी बनाई है। यह सहयोगी कंपनी आभासी भुगतान और भुगतान गेटवे की सेवाओं को देखेगी।

भुगतान गेटवे

जनवरी 2022 से भुगतान के लिए हर बार कार्ड के 16 डिजिट वाले नंबर को डालना जरूरी होगा। भुगतान गेटवे कंपनियां डेबिट या क्रेडिट कार्ड का ब्योरा ‘सेव’ नहीं कर सकती हैं। भुगतान गेटवे कंपनियां चाहती हैं कि रिजर्व बैंक इस तरह के नियमों से उन्हें छूट दे, लेकिन वह इस तरह की कोई भी छूट देने के विरोध में है। नए नियमों के मुताबिक, जनवरी 2022 से एक ही क्लिक पर भुगतान कंपनियों को सेवाएं देने, कार्ड का ब्योरा जमा करने पर रोक लग सकती है। ऐसे में डेबिट और क्रेडिट दोनों काडर्धारकों को 2022 से आॅनलाइन भुगतान करने के लिए हर बार अपने कार्ड के 16 अंकों के नंबर को दर्ज करने की जरूरत हो सकती है।

The post भुगतान क्षेत्र : भारत में बढ़ी होड़ appeared first on Jansatta.



From: Jansatta

Read Full Post ㅡ https://ift.tt/3mlMdpo

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार...

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार... From: ABP Live Read Full Post ㅡ htt...