Friday, April 1, 2022

अमन का रास्ता

गुरुवार को केंद्र सरकार ने नगालैंड, असम और मणिपुर के कुछ क्षेत्रों को अफस्पा कानून की छाया से मुक्त कर दिया। इससे इन तीनों प्रदेशों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। पूर्वोत्तर में अफस्पा हटाने की मांग दशकों से होती रही है। यह मांग आंदोलन के रूप में भी उठती रही है। यह कानून उन अशांत क्षेत्रों में लगाया जाता है, जहां कोई अराजक संगठन सक्रिय होता है और अपने वर्चस्व के लिए लगातार अशांति बनाए रखता है। अफस्पा, सशस्त्र बलों को विशेषाधिकार देता है, जिसके अंतर्गत वे उस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेकर वहां की व्यवस्था चलाते हैं।

अफस्पा को मानवाधिकार कार्यकर्ता मानव अधिकारों के बीच बाधा मानते आए हैं। मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू की भूख हड़ताल इसका उदाहरण है। अब जब केंद्र सरकार इन तीनों प्रदेशों से अफस्पा का दायरा समेटने का प्रयास कर रही है, तब यहां समृद्धि और शांति के साथ नई व्यवस्था के रूप में नए अध्याय की शुरुआत की उम्मीद की जा सकती है।

अमन गुर्जर, ग्वालियर



From: Jansatta

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