संयुक्त राष्ट्र में मतदान के दौरान भारत अनुपस्थित रहा। उसने किसी के भी पक्ष में मत नहीं दिया। ठीक किया। रूस भारत का पुराना और विश्वसनीय मित्र रहा है, जिसने प्रत्येक संकट की घड़ी में भारत का साथ दिया है, जबकि यूक्रेन हमेशा भारत के खिलाफ रहा है। याद कीजिए नेहरू युग में कैसे कश्मीर मसले पर बहस के दौरान रूस ने हमारे पक्ष में वीटो का इस्तेमाल किया था, अन्यथा कश्मीर के हाथ से चले जाने में देर न लगती।
प्रत्येक देश को अपने हितों को ध्यान में रख कर नीति निर्धारित करने का अधिकार है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत भी अपने हितों को ध्यान में रख कर कदम उठा रहा है। यूक्रेन में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने की उसकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
- शिबन कृष्ण रैणा, अलवर
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