Saturday, February 5, 2022

CID का दावा 5 रुपये में बिक रही है लोगों की पर्सनल जानकारी, सुरक्षा को लेकर हो जाएं सतर्क

साइबर धोखाधड़ी आज के समय में अधिक बढ़ गई है। लोगों की पर्सनल जानकारियां भी लीक हो जा रही हैं। इतना ही नहीं ये जानकारियां कौडियों के भाव बेची व खरीदी जा रही है। एक राज्‍य से चुराए जा रहे डेटा को दुसरे राज्‍यों में बेचा जा रहा है। सीआईडी यानी अपराध जांच विभाग ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि केवल 5 रुपये में लोगों की पर्सनल जानकारियां बेची जा रही हैं। सीआईडी ने साइबर फ्रॉड के ऐसे ही एक मामले का खुलासा किया है। आइए जानते हैं कैसे करता है यह गिरोह काम और कैसे करें बचाव।

ऐसे होता है डेटा डीलिंग का काम
डेटा डीलिंग साइबर धोखाधड़ी के व्यवसाय का एक हिस्‍सा हो चुका है। झारखंड जैसी जगह से चुराए गए डेटा को बंगाल जैसे दूसरे राज्यों में बेचा जा रहा है। अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के इनपुट के अनुसार, एक व्यक्ति के डेटा की कीमत केवल 5 रुपये है। सीआईडी ​​यह भी कहती है कि एक गिरोह काम करता है, जिसमें प्रत्‍येक सदस्‍यों को टॉस्‍क दिया जाता है। जिसके बाद इनके हाथ में डेटा आते ही काम शुरू हो जाता है।

साइबर अपराध का केंद्र झारखंड
झारखंड को अब साइबर अपराध का केंद्र कहा जा रहा है, जामताड़ा शहर को साइबर अपराधियों का विश्वविद्यालय कहा जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि झारखंड के युवा जामताड़ा से साइबर क्राइम की ट्रेनिंग लेते हैं और फिर देश के विभिन्न हिस्सों में फैल जाते हैं। ने एक बयान में कहा है कि साइबर क्राइम की दुनिया में एक व्यक्ति के डेटा की कीमत महज 5 रुपये है।

कहां से मिलता है डेटा
सीआईडी ​​के एसपी एस कार्तिक के अनुसार, यह डेटा अपराधियों को बैंक, मॉल, दूरसंचार कंपनियों, बीमा, ज़ेरॉक्स और अन्य स्थानों के माध्यम से मिलता है। इसके बदले में साइबर अपराधी डेटा देने वाले को पैसे देते हैं। जिसमें प्रत्‍येक डेटा की कीमत 5 रुपये तय की जाती है।

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साइबर सेल को मिली अहम जानकारियां
भारत की साइबर सेल को साइबर अपराधियों से जुड़ी अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। जिसके अनुसार, जानकारी हुई है कि कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों से डेटा केवल 5 रुपये प्रति व्यक्ति पर उपलब्ध कराया जाता है। इस डेटा में पीड़ित का नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण, आधार संख्या और अधिक विवरण शामिल हैं। इस डेटा का उपयोग करके, साइबर अपराधी एक बैंक प्रबंधक या एक बीमा एजेंट का रूप धारण करता है जो पीड़ित को उनके पैसे के लिए धोखा देता है।

ऐसे कर सकते हैं बचाव
इन जगहों पर कभी भी ऐसी जानकारियां शेयर न करें। साथ ही ऑनलाइन ट्रांजैक्‍शन तभी करना चाहिए, जब बहुत ही आवश्‍यक है। साथ ही इस बात की भी जानकारी रखनी चाहिए कि जिस साइट का हम उपयोग कर रहे हैं व कितना अथेंटिक है।

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From: Jansatta

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