हाल में शुरू हुए कर्नाटक में हिजाब मामले के मद्देनजर शिक्षण संस्थानों को अगले कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया, ताकि धार्मिक असहिष्णुता न बढ़े। इस मामले को सिर्फ धर्म के आईने से नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह सोचने की जरूरत है कि शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म के कपड़े पहन कर समानता नहीं लाया जा सकता। यह जरूर हो सकता है कि धर्म विशेष के लोग इसका पालन करें, हिजाब या बुर्का पहनें, लेकिन जिस समय वे कक्षा में आएं, उस दौरान समान ड्रेस में रहें।
ऐसा तो बिल्कुल नहीं है कि कहीं भी हिजाब पहनने पर रोक लगाई जा रही है। संविधान भी हमे अधिकार देता है कि हम अपने मन, धर्म और आस्था के मुताबिक पहनें, खाएं और रहें। गौरतलब है कि बात जब शिक्षण संस्थान की हो, देश में सेवा कर रहे जवानों की हो या फिर एनडीए में भर्ती को लेकर हो, इन सभी जगहों पर धर्म से ऊपर उठ कर एक ड्रेस कोड को मानना ही सर्वश्रेष्ठ है।
सुरक्षा की दृष्टि से भी हिजाब को स्कूल या ऐसी जगह पर अनुमति देना जायज नहीं होगा। इस विषय को धर्म से नहीं, बल्कि प्रत्येक कोण से देखने और समझने की आवश्यकता है, अन्यथा हम इसी में रह जाएंगे। दुनिया भर के कई देशों ने इसपर प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत की यह विशेषता रही है, यह सभी को धमार्नुसार कार्य करने और रहने की छूट देता है।
- अमन जायसवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय
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