बैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा होते हैं। आम लोगों द्वारा बैंकों में अपनी भविष्य की योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए छोटी-बड़ी बचत कर कमाई का पैसा बचाने के प्रयास किए जाते हैं। ‘चरमराई बैंकिंग व्यवस्था’ और ‘घपले करने वाले अधिकारियों की सांठगांठ’ की वजह से आए दिन हो रहे बैंक घोटाले आम लोगों की बचत का पैसा डुबो रहे हैं। साथ ही देश की छवि और साख को बट्टा लगा रहे हैं। एक समय विजय माल्या ने धनशोधन की बदौलत देश के अनेक बैंकों को करोड़ों का चूना लगाया तो वीडियोकान का मामला भी कोई छोटा-मोटा नहीं था।
पिछले कुछ सालों में हुए देश के बहुचर्चित पंजाब नेशनल बैंक और पीएमसी बैंक घोटालों के बाद अब ताजातरीन मामला एबीजी शिपयार्ड कंपनी द्वारा अट्ठाइस बैंकों के साथ किया गया करीब तेईस हजार करोड़ से अधिक रुपए का घपला सुर्खियों में बना हुआ है। बैंक क्षेत्र में हो रहे घोटाले विकास की ओर बढ़ते भारत देश की छवि को मलिन कर रहे हैं, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और चिंतनीय स्थिति है।
- नरेश कानूनगो, बंगलुरु, कर्नाटक
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