आजकल कर्नाटक के कालेजों में मुसलिम लड़कियों द्वारा हिजाब पहन कर जाने का मामला काफी तूल पकड़ चुका है। शिक्षण संस्थान विद्या का मंदिर होते हैं। वहां छात्र-छात्राओं को केवल अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान देना चाहिए। शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्धारित वर्दी पहन कर ही जाना चाहिए, इससे शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में समानता बनी रहती है। पढ़ाई के दौरान राजनीति करना और शिक्षण संस्थानों के दिशानिर्देशों की अवहेलना करना ठीक बात नहीं है।
विद्या के मंदिर बच्चों के भविष्य को संवारने का काम करते हैं। राजनीतिक दल तो मामले को तूल देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम करते हैं। बच्चों को इस ओर ध्यान नहीं देना चाहिए, उन्हें तो केवल अपनी पढ़ाई में ही मन लगाना चाहिए। राजनीति करने के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद बहुत अधिक समय होता है। बच्चे इस देश का भविष्य होते हैं। आने वाला कल इन्हीं के कंधों पर निर्भर करता है। इन छोटी-मोटी बातों को लेकर न तो शिक्षण संस्थान का माहौल खराब करना चाहिए और न ही अपनी पढ़ाई को बाधित करना चाहिए।
कई बार देखा गया है कि शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं में आपसी गुट बन जाते हैं और बहुत लड़ाई-झगड़े होते हैं, जो कि कई बार खून-खराबे में बदल जाते हैं और इससे बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। इन सब चीजों से छात्र छात्राओं को बचना चाहिए, तभी देश का भविष्य सुरक्षित होगा।
- नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजडू, जोगिंदर नगर
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