Sunday, January 23, 2022

सत्ता से खफा-खफा बरनाला के लोग

पंजाब का जिला बरनाला को वर्ष 2006 में संगरूर से तोड़ कर अलग किया गया था और तब से लेकर अब तक बाशिंदों को लगता है कि इससे बजाय उनका भला होने के, केवल राजनेताओं का ही एक और रास्ता खुल गया। यह इलाका हमेशा से ज्वलंत मसलों पर विरोध प्रदर्शनों के लिए चर्चित रहा है और आमतौर पर किसान संगठन बरनाला में ही अपने प्रदेश स्तरीय अधिवेशन आयोजित करते आए हैं। स्वतंत्रता पूर्व काल में भी सेवा सिंह ठिकरीवाल यहां के एक चर्चित किसान कार्यकर्ता रहे और वही पंजाब में प्रजा मंडल आंदोलन के संस्थापक भी थे। वह दरअसल, थे भी बरनाला के गांव ठिकरीवाल से ही।

इस जिले की प्रख्यात हस्तियों में दिवंगत सुरजीत सिंह बरनाला, जो पंजाब के मुख्यमंत्री भी रहे, पंजाब के एक लोकप्रिय उपन्यासकार एवं कवि राम सरूप अणखी और पहले जीवित परमवीर चक्र विजेता करण सिंह शामिल हैं। इस जिले में तीन विस हलके आते हैं- बरनाला, महल कलां और भदौर। एक सबसे अहम पहलू यह कि 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में इन तीनों हलकों से आम आदमी पार्टी-आप के प्रत्याशियों ने ही जीत दर्ज की थी।

बरनाला:

यहां से मौजूदा विधायक ‘आप’ से मीत हयात हैं। पहले लोग यहां से कांग्रेस या शिअद प्रत्याशियों को ही जिताते आए थे लेकिन 2014 में संसदीय चुनाव के बाद यह इलाका आप के पाले में चला गया। बरनाला रेलवे स्टेशन तो 1 अक्तूबर, 2020 से लेकर 15 दिसंबर, 2021 तक किसानों के धरनों-प्रदर्शनों का केंद्र बना रहा। यहां से एक बार फिर मीत हयात को ही आप ने प्रत्याशी बनाया है जबकि शिअद ने कुलवंत सिंह कीटू को जो पूर्व शिअद विधायक मलकीत सिंह कीटू के बेटे हैं, को टिकट दिया है जबकि यहां से कांग्रेस प्रत्याशी के नाम की घोषणा होना बाकी है तो एसएसएम ने अभिकरण सिंह नामक एक नए चेहरे को मौका दिया है जिन्हें स्वयं किसान तक अच्छे से नहीं जानते।

महल कलां:

यह एक आरक्षित हलका है जहां से वर्तमान विधायक आप के कुलवंत सिंह पूडूरी हैं। यह हलका 2007 के विस चुनाव के समय अस्तित्व में आया था। जब 2006 में बरनाला जिला बनाया गया तो इसे महल कलां नया नाम दे दिया गया जहां 2012 से ही विस चुनाव होते आ रहे हैं। म्यहां से इस बार भी आप ने कुलवंत सिंह पंडूरी को ही उम्मीदवार बनाया है जबकि सीपीआइ-एम एल ने गुरप्रीत सिंह रूड़के को टिकट दिया है।

भदौर:

यह भी एक आरक्षित हलका है जहां से आप के ही पीरमल सिंह धौला विधायक हैं, लेकिन जून 2021 में वे कांग्रेस में चले गए थे। यह मुसलिम बहुल हलका है और यही वजह है कि यहां जामा मस्जिद-लुधियाना के शाही इमाम सहित पंजाब के तमाम मुस्लिम धड़ों ने राजनीतिक दलों से यहां कब्रिस्तान के लिए जमीन दिए जाने के साथ-साथ उनके हितों ध्यान रखने की गुहार लगाई है। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस ने धरम वीर फौजी, आप ने लाभ सिंह उगोके और शिअद ने सतनाम सिंह राही और सीपीआइ-एम एल ने मजदूर संघ नेता भगवंत सिंह समाओ को मौका दिया है।

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From: Jansatta

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