Tuesday, January 11, 2022

युवाओं की चुनौतियां

हर देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं में युवाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। इन्हीं के बल पर समाज को गति प्रदान की जाती है। भारत के संदर्भ में देखा जाए तो यहां सबसे अधिक युवा हैं। यूएनडीपी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में युवाओं की आबादी पच्चीस करोड़ है, वहीं चीन की सत्रह करोड़ है। जिस रफ्तार से भारत की आबादी बढ़ रही है, ऐसा लगता है कि भारत चीन को पछाड़ कर जनसंख्या की दृष्टि से नंबर एक देश बन जाएगा।

सरकार ने स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की घोषणा की। स्वामी विवेकानंद एक महान समाज सुधारक, विचारक एवं दार्शनिक थे। उनके पद चिह्नों पर चल कर युवा आज भी अपने सपने को साकार कर रहा है। इनका विचार था कि जब तक हम अपनी जन्मभूमि को नहीं समझेंगे, तब तक हम विकास की ओर अग्रसर नहीं हो सकते। पाश्चात्यवाद की भौतिकता से हमें दूरी बना कर भारत की सनातन परंपरा, धर्म-अध्यात्म और वेदों की ओर ध्यान आकृष्ट करना होगा। हमें अपने अतीत को ध्यान में रखते हुए विकास के मार्ग पर बढ़ाना होगा।

जहां ‘युवाशक्ति’ ने भारत के लिए अवसर प्रदान किए हैं, वहीं कई चुनौतियां भी आन पड़ी हैं। इन युवाओं को स्वास्थ्य, उपयुक्त शिक्षा और यथोचित कौशल की जरूरत होगी, जिससे ये देश की अर्थव्यवस्था में पूरी-पूरी सहभागिता निभा सकें। आज के युवाओं में बेरोजगारी को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव के कारण युवाओं के सपने को धार नहीं मिल पा रही है। कहीं न कहीं युवा वर्ग अपने आप को अपेक्षित महसूस कर रहा है। नैतिक शिक्षा के अभाव के कारण वह खुदखुशी जैसे मार्ग चुन रहा है। यह सभ्य समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

आने वाले समय में भारत की युवा पीढ़ी को व्यवसायिक और तकनीकी शिक्षा प्रदान करके उन्हें अन्य देशों के मुकाबले खड़ा किया जा सकता है। युवा भारत के अतीत के गौरव हैं। उन्हें सही मार्गदर्शन देकर प्रतिभा पलायन को रोका जाए और उनके सीखे हुए मूल्यों को भारत के महत्त्वपूर्ण विकास में लगाया जाए। युवाओं को स्वामी विवेकानंद की तरह खुद अपनी समस्याओं से लड़ना होगा।

प्रशांत कुमार प्रजापति, गाजीपुर

  • किसान का दुख
  • देश का पेट भरने वाला अन्नदाता हमेशा मुश्किलों से घिरा रहता है। किसानों के लिए आफत बन कर आई मावठे की बारिश ओर ओलावृष्टि ने किसानों की गेहूं ,चने की फसल को बर्बाद कर दिया। मालवा-निमाड़ में कई किसानों की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। फसलें चौपट हो गर्इं। अब जरूरत इस बात की है कि सरकार तुरंत सर्वे करा कर किसानों को उचित मुआवजा देकर किसानो को राहत पहुंचाए।
  • पूनमचंद सीरवी, कुक्षी, धार, मप्र

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From: Jansatta

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