प्रकृति कहती है कि प्रत्येक जीव को पूरी सुरक्षा और स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन अफसोस की बात यह कि मनुष्य इस सिद्धांत में लगातार हस्तक्षेप कर रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डाबरा नामक क्षेत्र में एक झोलाछाप डाक्टर ने एक कुत्ते की बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि हमारे बेजुबान जानवर कितने सुरक्षित हैं।
बेजुबान जानवरों के साथ हो रही ऐसी क्रूरता का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल केरल में कुछ लोगों ने गर्भवती हथिनी के मुंह में विस्फोटक पदार्थ रख दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि विस्फोट से हथिनी की मौत हो गई।
हमारे देश में ऐसी और न जाने कितनी घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे कितने मामले होते हैं जो कभी समाज के सामने नहीं आ पाते और इनको कभी शिकार के बहाने तो कभी किसी और कारण से लोगों द्वारा इनकी हत्या कर दी जाती है। कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं कि कोई बेजुबान जानवर किसी के खेत खलिहान या घर में घुस गया तो उसकी हत्या कर दी जाती है।
इस प्रकार की जानवरों के साथ हो रही बर्बरता हमारे सभ्य समाज के दावे को तो खोखला करती ही है, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी नुकसानदेह है। इसलिए सरकारों को चाहिए कि वे इस दिशा में कुछ सकारात्मक और ठोस कदम उठाएं।
कायदे से इन बेजुबान जानवरों के लिए बने कानूनों में सकारात्मक संशोधन होना चाहिए, क्योंकि पशु क्रूरता अधिनियम के तहत इस प्रकार की घटना को पहली बार अंजाम देने वाले व्यक्ति पर आर्थिक जुर्माना बहुत कम है।
इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए केवल हम सरकारों पर निर्भर नहीं रह सकते। इसके लिए जरूरी है कि गैरसरकारी संगठन, समाज, शिक्षक वर्ग, स्थानीय निकाय और पंचायत स्तर पर भी पहल हो।
’सौरव बुंदेला, भोपाल, मप्र
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