संसद में बुधवार विपक्ष का गतिरोध जारी रहा। कार्यवाही शुरू होते ही उच्च सदन में विपक्षी दलों के सांसदों ने जमकर हंगामा किया और निलंबित किए गए सांसदों को वापस बुलाने की मांग की। इस मांग पर करीब 25 मिनट पर हंगामा और नारेबाजी हुई। बाद में जब हालात नहीं सुधरे तो राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने 12 बजे के लिए सदन स्थगित कर दिया। 12 बजे सदन शुरू होने के बाद भी हंगामे के बीच ही सदन का कामकाज निपटाया गया।
एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कुछ अन्य सदस्यों की ओर से नियम 267 के तहत नोटिस की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये नोटिस स्वीकार नहीं किए गए हैं। विपक्षी दलों के सांसद पूर्ण तैयारी से संसद में पहुंचे थे। उनके हाथों में पोस्टकार्ड थे।
उधर कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि दीपेंद्र हुड्डा ने जो नोटिस दिया है वह किसानों के मुद्दों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि आसन ने आश्वासन दिया था कि नियमों के तहत यदि इस मुद्दे को उठाया जाएगा तो चर्चा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पिछले सत्र में भी चर्चा नहीं हो सकी थी, यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस की सदस्य सुष्मिता देव ने 12 सदस्यों के निलंबन का मुद्दा उठाया। विपक्ष का कहना था कि सदस्यों का निलंबन अलोकतांत्रिक तरीके से किया गया है, जिसे रद्द किया जाना चाहिए।
शून्यकाल में हंगामे के बीच एनपीएफ सदस्य के जी केन्ये ने नगालैंड के एनपीएफ के सदस्य केन्ये ने प्रदेश में सेना की गोलीबारी में 14 लोगों के मारे जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफस्पा कानून) वापस लेने की मांग की। जनता दल यूनाईटेड के रामनाथ ठाकुर ने कोरोना संक्रमण के नए स्वरूप ओमीक्रोन का मुद्दा उठाया जबकि वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित किसानों के अन्य मुद्दे उठाते हुए इन पर विचार करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग की। तेलुगु देशम पार्टी के सदस्य कनक मेदला रविंद्र कुमार ने केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए आबंटित कोष को अन्यत्र खर्च किए जाने का मुद्दा उठाया।
अध्यक्ष ने दी सलाह, नेता सदन के मिलकर करें बात : एम. वेंकैया नायडू ने हंगामा कर रहे सदस्यों से बार बार अनुरोध किया वह अपने स्थानों पर लौटें और शून्य काल चलने दें, लेकिन इसके बावजूद हंगामा जारी रहा। उन्होंने इसे आसन की अवज्ञा व अलोकतांत्रिक बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले दस दिन से आप सदन में कामकाज नहीं होने दे रहे हैं, इसकी (विरोध प्रदर्शन की) अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि यह (जो आपने किया) सही है और कार्रवाई (12 सदस्यों का निलंबन) गलत है। यह सही नहीं है।
12 सांसदों का निलंबन रद्द करने की मांग
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद के मानसून सत्र के दौरान उच्च सदन में ‘अशोभनीय आचरण’ को लेकर शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के लिए राज्यसभा के 12 सांसदों के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को संसद परिसर में धरना दिया।
निलंबन के बाद से रोजाना प्रदर्शन कर रहे 12 निलंबित विपक्षी सांसदों ने आज भी संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना दिया। खड़गे, अखिलेश यादव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और कई अन्य विपक्षी सांसद उनके समर्थन के लिए पहुंचे और निलंबन रद्द करने की मांग की।
निलंबित राज्यसभा सदस्य अपने खिलाफ की गई इस कार्रवाई के विरोध में संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे। उनका कहना है कि जब तक निलंबन रद्द नहीं होगा, तब तक वे संसद की कार्यवाही के दौरान सुबह से शाम तक महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठेंगे।
पिछले सप्ताह सोमवार, 29 नवंबर को आरंभ हुए संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को इस सत्र की शेष अवधि के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था।
जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।
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From: Jansatta
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