Thursday, December 30, 2021

खतरे में लोकतंत्र

दुनिया में लोकतंत्र का ह्रास चिंताजनक है। सैन्य सरकारों के दमन ने लोकतंत्र के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। ऐसे में भारत की म्यांमा में लोकतंत्र की बहाली की मांग जायज है। भारत की म्यांमा को मानवीय आधार पर सहायता भी उचित है। जिस तरह म्यांमा में लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक में रखा गया, उससे स्वाभाविक ही दुनिया भर में चिंता जाहिर की गई। मगर वहां सैन्य सरकार ने दमन का सहारा लेकर उसकी हत्या कर दी। इस समय सैनिक प्रशासन लोकतंत्र समर्थकों पर जुल्म ढा रहा है। बड़ी संख्या में लोग जेलों में बंद हैं।

इसके साथ ही वहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम हैं। भारतीय विदेश सचिव की म्यांमा यात्रा इस मामले में मायने रखती है। संकटग्रस्त म्यांमा को भारत ने दस लाख खुराक कोरोना के टीके और दस हजार टन गेहूं-चांवल देने की पहल की है। भारत की नेक नीयती को समझते हुए वहां के सैन्य प्रशासन को लोकतंत्र की बहाली का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। वहां जेलों में बंद राजनीतिक बंदियों की रिहाई सुनिश्चित कर आपसी विचार-विमर्श से ही लोकतंत्र की वापसी संभव है।
’अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, मध्यप्रदेश

अभिनव पहल

झाखंड सरकार ने राशन कार्ड पर पेट्रोल सस्ता देने का एलान किया है। सुन कर अच्छा लगा कि किसी राज्य सरकार ने तो निम्न और मध्यम आयवर्ग के लोगों को सस्ता पेट्रोल मुहैया कराने के लिए कुछ तरीका निकाला। झारखंड सरकार की घोषणा के अनुसार 26 जनवरी से राशन कार्ड पर दुपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल पच्चीस रुपए सस्ता मिलेगा।

इस योजना की पारदर्शिता और केवल सही लोगों को इस योजना का लाभ मिले, पेट्रोल पंप मालिक तथा अन्य लोग इसका अनुचित लाभ न उठाएं आदि पर विचार किया जाना आवश्यक है। स्मार्ट राशन कार्ड और आनलाइन/ डिजिटल पेमेंट इस योजना की पारदर्शिता को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। पेट्रोल पंप मालिकों को सख्त हिदायत हो कि वे नकद भुगतान पर इस योजना का लाभ नहीं देंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इस योजना का लाभ दुपहिया वाहन चालक ही उठा पाएंगे।

इस वर्ष मई में जो पेट्रोल और डीजल के दामों का ग्राफ बढ़ना शुरू हुआ, वह नवंबर तक नहीं रुका। नवंबर में कुछ राज्य सरकारों ने वैट और उत्पाद शुल्क में कटौती करके पेट्रोल और डीजल के दामों को कुछ हद तक नियंत्रित करने की कोशिश की थी, पर उससे बहुत अधिक लाभ नहीं मिल पाया अब भी पेट्रोल के दाम पंचानबे रुपए प्रति लीटर से अधिक है। झारखंड सरकार का यह निर्णय अन्य सरकारों के लिए भी एक अभिनव उदाहरण है ताकि दुपहिया वाहन चालक ईंधन के बढ़ते दामों की मार से बच सकें।
’योगिता शर्मा, देहरादून

निगरानी जरूरी

संपादकीय ‘हादसे के कारखाने’ में बिल्कुल उचित चिंता जताई गई है। औद्योगिक विस्तार के साथ ही औद्योगिक रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। हमारे यहां उपक्रम, कारखाने, चिकित्सालय आदि बहुत उत्साह से प्रारंभ तो कर दिए जाते हैं, पर जैसे-जैसे वे पुराने होते जाते हैं, उनके रखरखाव पर ध्यान कम होता चला जाता है। ‘क्रास चेक सिस्टम’ हर विभाग और हर व्यवस्था में लगातार कार्यरत रहे इस पर ध्यान दिए जाने की अत्यंत आवश्यकता है।
’संतोष सुपेकर, उज्जैन

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From: Jansatta

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