अगर संसद सत्र बाधित होता है, वहां कोई काम नहीं होता, तो क्यों न सांसदों को मिलने वाले भत्तों में कटौती हो, जैसा निर्धारित लक्ष्य पूरा न कर पाने पर व्यावसायिक जगत में होता है। चालू संसद सत्र के पहले दिन से ही हंगामा हो रहा है। जब तक संसद में कोई सांसद कैसा प्रदर्शन करता है, इसका मापदंड निर्धारित नहीं होगा, तब तक राजनेता अपनी भूमिका का निर्वहन सही तरीके से नहीं करेंगे। संसद में गतिरोध को देखते हुए तत्काल किसी समाधान की उम्मीद नजर नहीं आती। संभावना है कि यह पूरा सत्र नागरिक केंद्रित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने और कानून बनाने की अपनी मुख्य भूमिका का निर्वाह नहीं कर पाएगा।
गतिरोध बने रहने का मुख्य कारण विपक्ष का कृषि कानून पर चर्चा न होना बता रहा है। क्या कृषि कानून पास होने और फिर वापस लिए जाने के कारण पर चर्चा करना उपयोगी होगा? भारतीय कृषि में आमदनी अन्य व्यवसाय की तुलना में बहुत कम है। किसान की आमदनी बढ़ाना भारत जैसे कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में अति आवश्यक है। वर्तमान मंडी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कृषि कानून आए, पर सरकार के अनुसार किसानों के एक वर्ग के विरोध स्वरूप इन कानूनों को वापस लिया गया। पर प्रश्न यह है कि किसान का भविष्य क्या होगा?
एक ऐसी सरकार के लिए, जिसके पास प्रचंड बहुमत है और हंगामे के बीच भी अपना एजेंडा प्राप्त कर सकती है, तो सदन के कामकाज को विपक्ष द्वारा ठप कर देने से उसके उद्देश्यों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। विपक्ष का हंगामा करना सरकार को कठिन प्रश्नों के उत्तर देने से बचाता है। यह सरकार के लिए राजनीतिक रूप से लाभदायक है। विपक्ष के कई सदस्य ऐसे हैं जो चाहते हैं कि सदन चल सके, पर उनका व्यक्तिगत लाभ पार्टी के प्रति वफादारी साबित करने में निहित है।
सरकार या विपक्ष के सभी सांसद जानते हैं कि वे संसद में कोई काम करें या न करें, इससे उनकी चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक सांसद की संसद में उपस्थिति, उसके द्वारा सदन में पूछे गए प्रश्न, प्रमुख बहसों में भाग लेना, भविष्य में होने वाली चुनावों में कोई आंकड़ा नहीं होता है। इसलिए जब तक मतदाता अपने चुने प्रतिनिधि के संसदीय प्रदर्शन को एक पैरामीटर नहीं बनाते, भारत की संसद में व्यवधान पैदा होते रहेंगे। क्यों न संसद की उत्पादकता को पैमाना मान कर सांसदों को वेतन और भत्ते दिए जाएं?
’परमवीर ‘केसरी’, मेरठ
चीन की मनमानी
वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब पूर्वी लद्दाख सेक्टर में चीन अपनी सैन्य संरचना मजबूत कर रहा है, जिस पर भारत ने चिंता जताई है। भारतीय पक्ष ने चीनी सेना से इस मुद्दे पर बातचीत की है। सूत्रों के मुताबिक एलएसी पर चीन नए निर्माण कर रहा है, जिनमें रहने की जगहें, सड़कें, नए हाईवे शामिल हैं। इसके साथ ही उसने मिसाइल रेजिमेंट समेत भारी हथियारों की तैनाती भी की है।
इसी कारण भारतीय पक्ष खासा चिंतित है। ये हवाई पट््िटयां मुख्य एयरबेस काशगर, गार गुंसा और होतन से अलग हैं। साथ ही एक बड़ा हाईवे भी बनाया जा रहा है, जो एलएसी पर चीनी सेना की पहुंच को और बेहतर करेगा। चीन अपनी वायु सेना के लिए ऐसी संरचनाएं बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है जो उसे काफी दुर्गम इलाकों में अमेरिकी और अन्य सैटेलाइट से बचा सकें। इससे निपटने के लिए भारत को व्यावहारिक कदम उठाने होंगे।
’आशीष कुमार मिश्रा, चित्रकूट, यूपी
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