आज बच्चों को लगभग हर जानकारी प्राप्त है। उन्हें लगता है कि पूरी दुनिया एक मोबाइल में यानी कि मुट्ठी में है और अभिभावकों को ऐसा लग रहा है कि बच्चे ‘स्मार्ट’ बनते जा रहे हैं। पर इसके नकारात्मक पहलू को देखें तो हमें बच्चों में एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, कमजोर आंखें, मोटापा और कई मानसिक समस्याओं को घर बनाते हुए देखेंगे। इस ओर अभिभावकों के साथ समाज की नजर जाना भी जरूरी है, क्योंकि ये हमारे भविष्य के निर्माता हैं और इनका सटीक और उचित विकास हमारी जिम्मेदारी है।
’अनुराग माथुर, धार, मप्र
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