Monday, December 13, 2021

किसानों से सबक

राहत के रास्ते’ (संपादकीय, 13 दिसंबर) पढ़ा। विवादित कृषि कानूनों को वापस के लिए किसानों को बेहद कड़ा संघर्ष और परिश्रम करना पड़ा। सरकार कानून वापस न लेने की जिद पर और किसान वापसी की मांग पर टिके रहे। दोनों पक्षों ने एक वर्ष तक ‘तपस्या’ की। सर्दी, गर्मी, बरसात का कहर झेलने के अलावा हरियाणा में तो कई बार गंदे और ठंडे पानी की बौछारों से आहत हुए किसानों पर पुलिस द्वारा बेरहमी से लाठीचार्ज से कई किसान खून से लथपथ हो गए, लेकिन किसान ‘तपस्या’ करते रहे।

दूसरी ओर सरकार ने धरना स्थलों के पास कंक्रीट के बड़े-बड़े अवरोधक, खाइयां, लोहे की मोटी-मोटी कीलें सड़कों पर गाड़ दीं। लेकिन किसानों को समझाने की सरकार की यह कोशिश सफल नहीं हुई, तो सरकार ने अचानक एक वर्ष बाद माफी मांगते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी।

संसद में इन कानूनों के रद्द होने के बाद किसानों ने भी आंदोलन का समापन कर दिया। जाने से पहले किसानों ने धरना स्थल पर झाडू लगा कर सफाई की। किसानों का यह कार्य उन लोगों के लिए सबक है, जिन किसानों को मवाली कहा जा रहा था, वे किस स्तर तक सभ्य, समझदार, धैर्यवान और वैचारिक स्तर पर समृद्ध हैं और उन लोगों के लिए भी सबक है, जो सड़कों या सार्वजनिक स्थलों पर राजनीतिक, धार्मिक, भंडारा या विवाह आदि के आयोजन के बाद कचरा और गंदगी फैला कर चले जाते हैं।
’अमरनाथ बब्बर, किशनगंज, दिल्ली

सौंदर्य का खिताब

भारत की हरनाज संधू ने ‘मिस यूनिवर्स’ का खिताब जीत लिया है। यह ताज भारत की झोली में इक्कीस सालों के बाद आया है। आखिरी बार 2000 में लारा दत्ता ने यह खिताब जीता था और उसी साल हरनाज संधू का जन्म हुआ था। इजराइल के एलात में सत्तरवीं मिस यूनिवर्स 2021 की प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें हरनाज संधू भारतीय प्रतियोगी थीं।

पंजाब की रहने वाली इक्कीस वर्षीय हरनाज संधू ने पराग्वे की नादिया फरेरा और दक्षिण अफ्रीका की ललेला मसवाने को पछाड़ कर इस खिताब पर कब्जा जमाया। सौंदर्य प्रतियोगिताओं में हरनाज संधू सत्रह साल की उम्र से भाग ले रही हैं। इससे पहले 2021 में वे ‘मिस दीवा- 2021’ का खिताब जीत चुकी हैं। 2019 में उन्होंने ‘फेमिना मिस इंडिया, पंजाब’ का खिताब जीता था और 2019 की फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता के शीर्ष बारह में उन्होंने जगह बनाई थी। इसके अलावा वे दो पंजाबी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं।

इक्कीस सालों के बाद भारत के लिए यह गौरवशाली ताज ले जाना सबसे बड़े गर्व का क्षण है। शीर्ष तीन यानी अंतिम राउंड के दौरान सभी प्रतिभागियों से पूछा गया था कि आज के समय में दबाव का सामना कर रही उन युवा महिलाओं को वे क्या सलाह देना चाहेंगी, जिससे वे उसका सामना कर सकें? इस सवाल पर हरनाज संधू ने कहा कि आज के युवा पर सबसे बड़ा दबाव उनका खुद पर भरोसा करना है। यह जानना कि आप अनोखे हैं, यह आपको खूबसूरत बनाता है।

अपने आप की दूसरों से तुलना करना बंद करिए और पूरी दुनिया में जो हो रहा है, उस पर बात करना बेहद जरूरी है। बाहर निकलिए, खुद के लिए बोलिए, क्योंकि आप ही अपने जीवन के नेता हैं। आप खुद की आवाज हैं। मैं खुद में विश्वास करती हूं और इसीलिए मैं आज यहां पर खड़ी हूं। इस जवाब पर हरनाज विजयी घोषित की गर्इं। इससे पहले शीर्ष पांच के राउंड में उनसे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा सवाल पूछा गया था। संधू से पहले केवल दो ही भारतीय ‘मिस यूनिवर्स’ खिताब पर कब्जा जमा सकी हैं। 1994 में पहली बार सुष्मिता सेन ने और दूसरी बार साल 2000 में लारा दत्ता ने यह खिताब जीता था।
’आशीष कुमार मिश्रा, चित्रकूट, उप्र

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From: Jansatta

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