असंगठित क्षेत्र के लिए शुरू किया गया ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल पर 8.43 करोड़ प्रवासी मजदूर पंजीकरण कर चुके हैं। इन मजदूरों के विकास के लिए अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करने की तैयारी कर रही है।
केंद्र इन कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने और उन्हें रोजगार के अवसरों को प्रदान करने में मदद करने के लिए राज्यों के संपर्क में है। इसके लिए सरकार इन मजदूरों के डेटाबेस को ‘उन्नति’ से जोड़ने जा रही है। ‘उन्नति’ पोर्टल पर जॉब संबंधित सभी तरह की जानकारी मिलेगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने पंजीकरण के बारे में जानकारी देते हुए कहा- “शुरुआत में, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया में एक प्रश्न शामिल था कि क्या आवेदनकर्ता एक प्रवासी श्रमिक हैं, लेकिन इस सवाल को बाद में हटा दिया गया था। जब पंजीकरण प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच जाएगी, तो घर के पते और काम के पते के बीच अंतर को पता लगाने के लिए डेटा का अध्ययन किया जाएगा। यदि मजदूर के कार्य का पता गृहनगर के बाहर है – तो उसे प्रवासी श्रमिक माना जाएगा”।
ब्लू-कॉलर और ग्रे-कॉलर जॉब के लिए इस डेटाबेस को उन्नति से भी जोड़ा जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि नियोक्ता और कर्मचारी दोनों इसका उपयोग कर सकेंगे। अधिकारी ने कहा- “शुरुआती चर्चा हो चुकी है और ई-श्रम पोर्टल के डेटाबेस को उन्नति पोर्टल से जोड़ने से संबंधित काम 6-8 सप्ताह में शुरू हो जाएगा।”
पोर्टल पर लगभग 400 कामों का विवरण हैं। अधिकारी ने कहा- “मान लीजिए, उदाहरण के लिए, एक नगर पालिका को राजमिस्त्री या किसी अन्य श्रमिक की जरूरत है, तो वे स्थानीय परियोजनाओं के लिए ऐसे श्रमिकों की पहचान करने और उन्हें काम पर रखने के लिए डेटाबेस का उपयोग कर सकते हैं।”
सरकार में इस बात पर लगातार चर्चा हो रही है कि सभी की सामाजिक सुरक्षा होनी चाहिए। संगठित और असंगठित मजदूरों के अनुसार योजनाओं को तैयार करना होगा। श्रम मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- “राज्य और केंद्र स्तर पर योजनाओं के बेहतर तरीके से लाने के लिए राज्यों के साथ चर्चा की जा रही है। यह एक धीमी प्रक्रिया हो सकती है लेकिन एक सकारात्मक प्रक्रिया होगी”।
सरकार पहले ही दुर्घटना बीमा को ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण से जोड़ने की घोषणा कर चुकी है। यदि कोई पंजीकृत कर्मचारी दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसे मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपये और आंशिक विकलांगता पर 1 लाख रुपये मिलेंगे। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार और झारखंड में अब तक मजदूरों का पंजीकरण सबसे अधिक हुआ है।
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