Wednesday, November 24, 2021

खिताब बचाने की चुनौती

मनीष कुमार जोशी

तोक्यो ओलंपिक में भारत को कई खेलों में नई उम्मीदें दी है। हाकी ऐसे ही खेलों में से एक है। तोक्यो ओलंपिक में भारत ने हाकी में कांस्य पदक जीतकर ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की थी। ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ा है। भारतीय हाकी इस समय कामयाबी की वजह से उत्साह से लबरेज है। यही कारण है कि भुवनेश्वर में खेले जा रहे जूनियर पुरुष हाकी विश्व कप में भारत की उम्मीदें परवान पर हैं। भारत जूनियर पुरुष हाकी विश्व कप में पूर्व चैंपियन है। वर्ष 2016 में भारतीय टीम ने पुरुष जूनियर विश्व कप जीता था। कामयाबी की सरपट दौड़ती गाड़ी के कारण भारत को इस विश्वकप में खिताब जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि भारत अपने खिताब की रक्षा कर पाएगा।

हाकी विश्व कप के सफल आयोजन के बाद भारत इस बार पुरुष जूनियर हाकी विश्व कप का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन विश्व कप की तरह ही भुवनेश्वर में हो रहा है। कोविड-19 के कारण इस विश्व कप के मैच बायो बबल में ही खेले जाएंगे और दर्शको के आने की अनुमति नहीं होगी यानी पूरी प्रतियोगिता दर्शकों के बिना खेली जाएगी। भुवनेश्वर में विश्व कप हाकी का आयोजन होने से हॉकी का और खेलों का ढांच तैयार है। ओड़ीशा राज्य की सरकार द्वारा भी ऐसे आयोजनों को पूरा समर्थन दिया जा रहा है। हाकी खेलने वाले सारे देशों के संगठन भुवनेश्वर में उपलब्ध करवाई जा रही है। सेवाओं से संतुष्ट हैं। भारत में इस प्रकार के आयोजन होने से हाकी को एक ताकत मिलती है।

जूनियर हाकी विश्वकप महज एक प्रतियोगिता आयोजन करवाने की खानापूर्ति नहीं है। यह एक देश की सीनियर टीम तैयार करने की नीव की खोज है। भारत वर्ष 2016 में जूनियर विश्व कप का खिताब जीतकर चैंपियन है। भारत की यही जीत तोक्यो ओलंपिक में कामयाबी का आधार बनी। वर्ष 2016 की चैंपियन जूनियर टीम के नौ खिलाड़ी तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य थे।

भारत जूनियर विश्वकप आयोजन की महत्ता अच्छी तरह समझता है इसीलिए इस आयोजन के लिए भारतीय हाकी फेडरेशन ने सीनियर टीम के कोच सहित कई वरिष्ठ खिलाड़ियों को इस आयोजन पर नजर रखने के लिए भेजा है। जूनियर टीम के कोच बीजे करिअप्पा को पूरा विश्वास है कि टीम अपने खिताब को बचा लेगी। कोच करिअप्पा टीम के साथ लगातार कड़ी मेहनत कर रहे हैं। टीम को और मजबूत बनाने के लिए टीम के साथ सीनियर टीम के कोच ग्राहम रीड भी भुवनेश्वर में है। ग्राहम रीड भी जूनियर खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण टिप्स दे रहे हैं।

टीम की कप्तानी ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य विवेक सागर कर रहे हैं। विवेक को पूरा विश्वास है की टीम एक बार फिर जूनियर विश्वकप का खिताब जीतेगी। इसका सबसे बड़ा कारण परिस्थितियां भारत के पक्ष में नजर आ रही है। सबसे पहले भारत के पक्ष में जो सबसे बड़ी बात है वह है आयोजन भारत में होना। प्लेइंग कंडीशन का पक्ष में होना मैच में महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। दूसरी सबसे बड़ी बात भारतीय टीम का ऐसे ग्रुप में होना है जहां नाकआउट दौर में पहुंचने के लिए भारत को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी । भारत फ्रांस कनाडा और पोलैंड के साथ ग्रुप में है। भारत को इन टीमों के साथ लीग मैच खेलने होंगे। ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रहने वाली दो टीमें नाकआउट दौर में प्रवेश करेगी।

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From: Jansatta

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