लखनऊ में डीएम ने निर्देश दिए हैं कि जीका वायरस से पीड़ित मरीजों के घर के चारों ओर 400 मीटर तक कंटेनमेंट जोन बनाया जाए और मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जाए। एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि जीका वायरस पर नियंत्रण के लिए बुलाई गई बैठक में डीएम ने यह बात कही थी।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक डीएम ने मॉनिटरिंग कमिटी भी बनाने का आदेश दिया है। सभी इलाकों के निरीक्षण के लिए सुपर सर्विलांस टीम भी बनाई जाएंगी। इनमें से 25 टीमें सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात रहेंगी और ये टीमें घर जाकर मरीजों के बारे में जानकारी भी इकट्ठा करेंगी। इसके अलावा बस स्टॉप और रेलवे स्टेशन पर भी लोगों को तैनात करके उन लोगों की पहचान की जाएगी जो कि जीका प्रभावित जिलों या राज्यों से आ रहे हैं।
जिले के आठ अस्पतालों में जीका वायरस के मरीजों का इलाज करने के लिए वॉर्ड बनाए जाएंगे। बता दें कि इस समय उत्तर प्रदेश में भी जीका वायरस के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा केस कानपुर में पाए गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कल तक कानुपर में 113 से ज्यादा केस मिले थे। इसमें से कई लोग ठीक भी हुए हैं।
कैसे फैलता है जीका वायरस?
जीका वायरस मुख्य रूप से मच्छरों के काटने से फैलता है। जहां जीका के मरीज मौजूद हैं वहां जाना खतरनाक साबित हो सकता है। यह वायरस गर्भवती महिला से उसके बच्चे तक औऱ यौन संपर्क से भी फैल सकता है। इसके लक्षण दिखने पर सबसे पहले पानी औऱ अन्य पेय पदार्थ ज्यादा पीने की सलाह दी जाती है। इससे बचने के लिए मच्छरों से बचना बहुत जरूरी है।
क्या हैं लक्षण?
शुरुआत में लक्षण बहुत ज्यादा नहीं दिखायी देते हैं। बुखार आना, रेशेज पड़ना, शरीर में दर्द, सिरदर्द और उल्टी जैसे लक्षण इस बीमारी में शामिल होते हैं। गर्भवती महिलाओं को इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा होता है। यह वायरस भ्रूण में भी जा सकता है जिससे मस्तिष्क दोष हो सकता है।
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