दिल्ली सहित उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में प्रदूषण बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। हालत ये है कि अब सांस लेना मुश्किल हो गया है और लोगों को घरों में ही रहने को कहा जा रहा है। वैसे दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम में प्रदूषण की स्थिति पिछले कई सालों से खराब है और हर साल अक्तूबर से ही यह समस्या शुरू हो जाती है। इसका बड़ा कारण पड़ोसी राज्यों से आने वाला पराली का धुआं है। पर इस वक्त दिल्ली सहित दूसरे शहरों की जो हवा बिगड़ी है, उसका बड़ा कारण पटाखों का धुआं रहा है।
इसने आग में घी का काम कर दिया। कहने को राष्ट्रीय हरित पंचाट (एनजीटी) से लेकर दिल्ली सरकार तक ने पटाखों पर पांबदी लगा रखी थी, पर यह कवायद पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। कानून को एक तरफ रखते हुए लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े। नतीजा यह हुआ कि पटाखों को जलाने से आसमान में धुएं की चादर छा गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दिवाली की रात दिल्ली सहित आसपास के शहरों में दमघोंटू प्रदूषण हो चुका था। पैमाने के हिसाब से देखें तो वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खतरनाक स्तर को भी पार कर गया और नोएडा में तो नौ सौ निन्यानवे तक दर्ज किया गया।
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, देश के कई शहर वायु प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहे हैं। इसका पता तब ज्यादा चलता है जब वैश्विक पर्यावरण संस्थान अपने वायु प्रदूषण सूचकांक में शहरों की स्थिति को बताते हैं। पिछले कई सालों से दुनिया के पहले तीस प्रदूषित शहरों में भारत के कई शहर दर्ज होते रहे हैं। जाहिर है, हम वायु प्रदूषण के दिनोंदिन गहराते संकट से निपट पाने में तो कामयाब हो नहीं पा रहे, बल्कि जानते-बूझते ऐसे काम करने में जरा नहीं हिचकिचा रहे जो हवा को जहरीला बना रहे हैं।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साफ कहा है कि दिवाली की देर रात हवा में पीएम-2.5 और 10 आकार के जो जहरीले कण बढेÞ हैं, उनका कारण पटाखों का धुआं रहा है। हवा नहीं चलने से कुछ ही घंटों में बहुत ज्यादा मात्रा में पटाखों का धुआं आसमान में फैलता गया। अगर इतने ज्यादा पटाखे नहीं फूटते तो आज हालात शायद इतने नहीं बिगड़ते।
इस हकीकत से तो कोई अनजान नहीं है कि लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों को बीमार बना रहा है। ज्यादातर गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण जहरीली हवा है। बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े सभी सांस संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। प्रदूषित हवा से कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी की बात हम पिछले कई सालों से सुन ही रहे हैं। यह भी याद रखना चाहिए कि अभी कोरोना संकट से मुक्ति नहीं मिली है।
चिकित्सक बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि वायु प्रदूषण ज्यादा होने से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि प्रदूषित हवा में कोरोना विषाणु को बने रहने का मौका मिल जाता है और इससे संक्रमण कहीं ज्यादा तेजी फैल सकता है। हैरानी की बात तो यह है कि यह सब जानते-बूझते भी हम ऐसी पहल करने से कतराते हैं जो हवा को खराब होने से बचा सकती है। मसला केवल पटाखों तक सीमित नहीं है। चाहे पुराने वाहनों का हो, या पराली जलाने का हो, ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कोई एक राय नहीं बन पाना या इनके समाधान की दिशा में नहीं बढ़ पाना चिंता पैदा करता है। प्रदूषण से बचाव के लिए सिर्फ सरकारी प्रयासों से काम नहीं चलने वाला, इसके लिए जनभागीदारी कहीं ज्यादा जरूरी है।
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From: Jansatta
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