Thursday, November 11, 2021

लापरवाही की हद

देश में कभी-कभी ऐसी दुखद और दिल दहलाने वाली घटनाएं सुर्खियां बनती हैं, जो हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि ऐसी घटनाओं का कारण लापरवाही है या सचमुच कोई हादसा। इन पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। एक सप्ताह में ही देश के दो अस्पतालों में आग की घटनाएं सामने आर्इं। बीते शनिवार को महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक सरकारी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भीषण आग लग गई।

उसमें कोविड-19 के ग्यारह मरीजों की मौत हो गई। दूसरी घटना भोपाल की है, जहां एक अस्पताल में बच्चों की विशेष एसएनसीयू यानी नवजात शिशु इकाई में सोमवार रात आग लगने से चार बच्चों की मौत हो गई। यह आग कैसे लगी, इसका असली कारण तो उचित और निष्पक्ष जांच से ही पता चल सकता है। इससे पहले भी देश में ऐसे दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। अगर उनसे सरकारों और प्रशासन ने सबक लिया होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। एक बार फिर सरकार, प्रशासन और अन्य भ्रष्ट अधिकारियों की लापरवाही मासूमों की जान पर भारी पड़ गई।

जिस देश में भ्रष्टाचार चरम पर हो, जहां सरकारीतंत्र भ्रष्टाचार के दलदल में बुरी तरह धंसा हो, वहां भविष्य में भी ऐसी लापरवाही से होने वाले हादसों पर शायद ही लगाम लगे। इन अस्पतालों में आग की घटनाओं पर सरकार और प्रशासन तभी तक जागे रहेंगे और भविष्य में ऐसे लापरवाही से होने वाले हादसे रोकने की बातें करेंगे जब तक यह मीडिया में सुर्खियों में बना रहेगा। फिर कुछ मुआवजे का मलहम लगाकर, तो कुछ हादसे की जांच के आदेश देकर और आरोपियों को सख्त सजा देने का आश्वासन देकर फिर अगले हादसे के इंतजार में कुंभकर्णी नींद सो जाएंगे!
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

गुनाह और सजा

क्या अब इस देश के लोकतंत्र में मानवाधिकार की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है? आपको मार भी खानी है और उसका कोई जिक्र भी नहीं करना है। अगर करोगे तो आप पर यूएपीए लगा दिया जाएगा। जैसा कि त्रिपुरा में पिछले एक सप्ताह से देखने को मिल रहा है। त्रिपुरा पुलिस के कार्यकारी पीआरओ, एडिशनल एसपी ने बताया कि हालात पिछले नौ दिनों से पूरी तरह से काबू में हैं। एक भी वाकया नहीं हुआ है।

मगर सोशल मीडिया और मुख्य मीडिया पर इसकी चर्चा जारी है। इससे सूबे का सांप्रदायिक माहौल खराब किया जा रहा है। इन्होंने यह तो माना कि वहां अल्पसंख्यकों के ऊपर जुल्म हुए हैं, मगर हाल-फिलहाल नहीं हुए हैं। तो क्या जब हुआ था, उसका जिक्र करना गैरकानूनी है? क्या इतना लिख देना कि त्रिपुरा जल रहा है, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज करने लायक अपराध की श्रेणी में आता है?
निश्चित रूप से आज के माहौल में हमारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार किया जा रहा है।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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From: Jansatta

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