Sunday, November 7, 2021

सर्वोत्तम है कार्तिक मास

कार्तिक मास में तारों की छांव में गंगा स्नान करने का विशेष महत्व होता है। इसी महीने भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और ब्रह्मा द्वारा निर्मित सृष्टि को आनंदित बनाने के लिए वे अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु अर्धांगिनी मां लक्ष्मी भी पवित्र कार्तिक मास में पृथ्वी पर भ्रमण कर भक्तों का उद्धार करती हैं। कार्तिक मास में तुलसी का रोपण और विवाह सर्वोत्तम माना गया है। इस महीने में श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी और नारायण की पूजा करने वाले लोगों को कभी धन की कमी नहीं होती।

कार्तिक मास में करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, नरक चतुर्दशी ,दीपावली, गोवर्धन पूजा- अन्नकूट, भैया दूज-यम द्वितीया, अक्षय नवमी-आंवला नवमी, देवोत्थान एकादशी, तुलसी शालिग्राम विवाह के पर्व होते हैं। देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और इसी दिन से मांगलिक कार्यों विवाह आदि की शुरपआत होती है। शालीग्राम के रूप में भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह भी इसी महीने कराया जाता है।

आयुर्वेद में कार्तिक मास का महत्त्व

आदर्श आयुर्वेदिक फार्मेसी के सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक वैद्य दीपक कुमार का कहना है कि कार्तिक मास में सूर्य की किरणों के स्नान का विशेष महत्त्व है। आयुर्वेेद के अनुसार कार्तिक मास में दाल खाने से परहेज करना चाहिए और दोपहर में सोने से बचना चाहिए। साथ ही कार्तिक मास में होने वाले दीपावली पर्व पर खील और बतााशे खाने का विशेष महत्व है जिसके खाने से पित्त संबंधी रोगों का निदान होता है। कार्तिक मास का शहद आयुर्वेद में अमृत माना गया है और करेला, बैंगन, चावल, लौकी खाने से बचना चाहिए। इस महीने आंवले के सेवन का विशेष महत्व है।

तीन दिन में पूरे कार्तिक मास के पुण्यों की प्राप्ति

वैदिक मान्यता है कि कार्तिक महीने के सभी दिन अगर कोई गंगा स्नान नहीं कर पाए तो उसे माह के आखिरी तीन दिन त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा में लगातार तारों की छांव में सूर्योदय से पूर्व गंगा स्नान करना चाहिए। इससे महीने भर के कार्तिक मास के स्नान बराबर के पुण्यों की प्राप्ति श्रद्धालु को होती है। कार्तिक महीने में दान-पुण्य, पूजा-पाठ और नदी में स्नान करने की विशेष मान्यता है। इस माह में पवित्र नदियों मे स्नान करने और दान-पुण्य करने से मानव पाप मुक्त हो जाते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं। इस माह में कुंवारी कन्या को नदी में स्नान करने से मनोवांछित जीवनसाथी मिलता है। कार्तिक माह में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, यम देवता, धनवंतरी, गोवर्धन, भगवान श्री कृष्ण और चित्रगुप्त की पूजा का विशेष महत्व है।

खास है कार्तिक मास

जाने-माने ज्योतिषाचार्य डाक्टर प्रतीक मिश्रपुरी कहते हैं कि महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में अन्न का दान का विशेष महत्व है। शिवपुराण के अनुसार कार्तिक में गुड़ का दान करने से मधुर भोजन की प्राप्ति होती है। स्कंदपुराण में कहा गया है कि मासों में कार्तिक, देवताओं में भगवान विष्णु और तीर्थों में नारायण तीर्थ बद्रिकाश्रम श्रेष्ठ है। यह तीनों ही कलियुग में अत्यंत दुर्लभ हैं।

कार्तिक के समान दूसरा कोई मास नहीं। गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि वनस्पतियों में तुलसी, तीर्थ क्षेत्रों में द्वारिकापुरी, तिथियों में एकादशी और माहों में कार्तिक माह मुझे विशेष प्रिय हैं। इस तरह कार्तिक मास का विशेष महत्त्व सनातन धर्म में माना गया है और माहों में कार्तिक माह सर्वोत्तम माना जाता है। इस बार 19 अक्तूबर से 19 नवंबर तक कार्तिक मास है और कार्तिक पूर्णिमा 19 नवंबर को है।

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From: Jansatta

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