बहुत कुछ राहत देने वाली कृषि कानून रद्द करने की प्रधानमंत्री की घोषणा का किसानों को प्रसन्नता के साथ स्वागत करना चाहिए। यह घोषणा इसी सत्र में पूरी होनी है। ‘तपस्या में कमी रही’ शब्द का उल्लेख स्पष्ट करता है कि सरकार को कुछ तो पश्चाताप है, क्योंकि आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों की मौत के साथ हजारों किसानों ने शारीरिक तथा आर्थिक नुकसान उठाया है।
हालांकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के गारंटी कानून की मांग भी उचित है, जिसे सरकार को मानना होगा। स्थिति के मद्देनजर इतना कहा जा सकता है कि किसानों की पूरी जीत नहीं हुई है, किंतु शासन की उदारता मान कर आंदोलन को अब ज्यादा खींचना अनुचित होगा, क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में होने से अब किसानों के साथ किसी प्रकार से वादाखिलाफी नहीं हो सकेगी।
’बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, तराना, उज्जैन
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