कोरोना विषाणु का नया रूप दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से निकला है। लंदन स्थित जेनेटिक इंस्टीट्यूट के निदेशक फेल्क बेलौस का मानना है कि यह नया रूप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज से पैदा हुआ है। इसके सबसे ज्यादा मरीज दक्षिण अफ्रीका में मिले हैं। इस विषाणु के बहुत तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इसे बड़ा खतरा मानते हैं। यह डेल्टा वैरिएंट से पांच गुना खतरनाक माना जा रहा है। बताया जाता है कि इसके पचास से ज्यादा म्युटेंट मिल चुके हैं, जिसमें बत्तीस इसके स्पाइक प्रोटीन में ही हैं। यह शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए स्पाइक प्रोटीन का सहारा लेता है। यह वायरस शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को धोखा देते हुए मरीजों की मौत का कारण बन जाता है।
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि यह नया वैरिएंट वैक्सीन को भी बेअसर करने में सक्षम है। डाक्टरों के अनुसार इसका हवा में फैलने का खतरा है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस खतरे को भांपते हुए इस पर नियंत्रण करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है। अफ्रीकी देशों में हवाई सेवाएं रोकने का सिलसिला शुरू हो गया है। भारत सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सघन जांच की जाए, खासकर दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग, बोत्सवाना से सीधे आने वाले यात्रियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। चिंताजनक बात यह है कि यह वैरिएंट कोविड-19 टीका ले चुके लोंगों पर भी बेअसर हो जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल, ब्राजील, कनाडा, आस्ट्रेलिया, फ्रांस जैसे अमीर देश अपने नब्बे प्रतिशत नागरिकों को टीका लगा चुके हैं।
भारत के संदर्भ में यह बहुत चिंताजनक बात होगी, क्योंकि यह विश्व का दूसरी बड़ी आबादी वाला देश है और अगर यह वैरिएंट यहां प्रवेश कर जाता है, तो इसके बहुत तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। भारत में पूरी जनसंख्या को अभी टीका नहीं लग पाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा ब्रिटेन, अमेरिका, ब्राजील, इजराइल के वैज्ञानिक इस नए वैरिएंट से बहुत ज्यादा चिंतित और चौकन्ना हो गए हैं। भारत में कोरोना वायरस के प्रकोप से थोड़ी राहत मिलने पर जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, लेकिन एक बार फिर बड़े खतरे की आहट सुनाई देने लगी है।
कोविड-19 संक्रमण को लगभग दो साल होने जा रहे हैं और इसके बाद भी इसके फैलाव पर पर रोक नहीं लग पाना दुनिया भर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। बोत्सवाना वैरिएंट के प्रति वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि कहीं यह महामारी की तीसरी लहर न ले आए, जो वैश्विक स्थिति के लिए बहुत खतरनाक होगी। भारत वासियों को इस संदर्भ में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
’संजीव ठाकुर, रायपुर, छत्तीसगढ़
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