Thursday, October 28, 2021

यादगार होगी रजनीकांत के लिए यह दीपावली

रजनीकांत ने साढ़े चार दशक में अपनी एक अलग अभिनय शैली विकसित की। लटके-झटकों से परहेज नहीं किया। एक्शन दृश्यों से लेकर सिगरेट उछाल कर ओठों से पकड़ना उनका टिपिकल अंदाज बना। मीडिया में उनकी अतिमानव छवि को लेकर लतीफे बने। तमिल फिल्मों में उनके प्रतिद्वंद्वी कमल हासन ने जहां अभिरुचि संपन्न सिनेमा और अभिजात वर्ग के दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, वहीं आम सिनेमाप्रेमी रजनीकांत के अंदाज और लटकों-झटकों पर लट््टू रहा है। उन्हें इसी सप्ताह 2019 का दादा साहेब फालके पुरस्कार मिला है, जिसने रजनीकांत की दीपावली को यादगार बना दिया है।

25 अक्तूबर को रजनीकांत को फिल्मी दुनिया का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फालके प्रदान किया गया और रजनीकांत के लिए यह दीपावली यादगार बन गई है। एक तो उन्हें फालके पुरस्कार मिला है जिसकी चाह उनके प्रशंसक लंबे समय से करते आ रहे थे। दूसरे उनके दामाद धनुष को भी नौ साल बाद दूसरा (तमिल फिल्म ‘असुरन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता) और कुल मिलाकर चौथा (बतौर सह निर्माता दो राष्ट्रीय पुरस्कार) राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या और धनुष की शादी 2004 में हुई थी।

ससुर और दामाद को साथ में मिले पुरस्कारों का अपना महत्व है मगर रजनीकांत को एक तोहफा तमिलनाडु सरकार ने दिया है। सरकार ने राज्य में कोरोना के चलते सिनेमाघरों पर जो 50 फीसद क्षमता का प्रतिबंध लगाया था, वह उठा लिया है। मतलब राज्य में एक नवंबर से सिनेमाघर पूरी क्षमता के साथ कारोबार कर सकेंगे। इसक सीधा फायदा रजनीकांत को मिलेगा, क्योंकि तीन दिन बाद रजनीकांत की फिल्म ‘अन्नाथे’ (चार नवंबर से) रिलीज होने जा रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरासोली मारन के पुत्र कलानिधि मारन की कंपनी सन पिक्चर्स ने ‘अन्नाथे’ का निर्माण किया है और इसके वितरण अधिकार भी उसी के पास हैं। सन पिक्चर्स ‘अन्नाथे’ को दशहरे पर सिनेमाघरों में पचास फीसद क्षमता के साथ रिलीज करनेवाली थी। इसका प्रदर्शन स्थगित करने का उसे फायदा मिलेगा क्योंकि अब ‘अन्नाथे’ सौ फीसद क्षमता के साथ रिलीज होगी।

रजनीकांत 70 साल के हो चुके हैं, मगर दक्षिण भारत में उनकी लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। बीते दिनों राजनीतिक पार्टी बनाने और उसके बाद अपने स्वास्थ्य को लेकर वह चर्चा में थे। ‘अन्नाद्रमुक सत्ता में आई तो तो तमिलनाडु को भगवान भी नहीं बचा सकता’ जैसी 90 के दशक में की गई उनकी टिप्पणी ने खूब हंगामा किया था। इसके बाद ही उनके राजनीति में प्रवेश को लेकर कयास लगाए जाने लगे थे। 2004 में उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रति अपने झुकाव को सार्वजनिक किया।

आखिर 2017 में रजनीकांत ने ‘रजनी मक्कल मंदरम’ नामक पार्टी बनाकर राजनीति में प्रवेश की घोषणा कर ही दी। माना जा रहा था कि रजनीकांत श्रीलंका में पैदा हुए एमजी रामचंद्रन और कर्नाटक में पैदा हुई जे जयललिता की तरह तमिलनाडु के गैरतमिल मुख्यमंत्री बन सकते हैं। उनके विरोधियों ने जब तब इसी कारण को आगे करते हुए उनके राजनीति में प्रवेश को रोकने की कोशिशें कीं थी। मगर स्वास्थगत कारणों का हवाला देकर 2021 में पार्टी खत्म कर उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश की संभावनाओं पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। उनके इस निर्णय पर लोग हैरान थे और रजनी के प्रशंसक परेशान।

राजनीति की दुनिया से ज्यादा लोकप्रियता रजनीकांत को सिनेमा की दुनिया से मिली। 1975 में के बालाचंदर की ‘अपूर्वा’ रानांगल के प्रदर्शन के साथ रजनीकांत ने फिल्मों में प्रवेश किया था। साढ़े चार दशक बाद दीपावली पर रिलीज होने जा रही उनकी ताजा फिल्म ‘अन्नाथे’ से रजनीकांत की लोकप्रियता के ग्राफ का स्पष्ट पता चलेगा।

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From: Jansatta

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