कहने के लिए अमेठी के परिवहन विभाग में सबकुछ आनलाइन है। लेकिन सभी पटल के बाबुओं का अलग से लेनदेन तय है, जिससे उप संभागीय कार्यालय में बिना रुपये दिए कोई कार्य संभव नहीं हो पाता है। परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार को लेकर अमेठी के उप संभागीय अधिकारी ने बताया कि दलालों का प्रवेश यहां वर्जित है। अंदर आने वाले दलाल जेल भेजे जाएंगे। लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, वाहन ट्रांसफर, अनापत्ति प्रमाण-पत्र आदि कार्य बिना सुविधा शुल्क लिए नहीं होता है।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए भी दलालों के पास जाना पड़ता हैं। आरटीओ कार्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि महकमे में अवैध रूप से काम करने वाले दलालों के कोड नंबर जारी किए गए हैं। पटल के जिम्मेदार बाबू पत्रावली पर दलालों का कोड नंबर देखकर काम करते हैं। वरना बिना कोड नंबर की फाइल वापस हो जाती है। दलालों की पहचान कोड नंबर से होती है।आरटीओ कार्यालय में दलालों की लंबी फौज है। अंदर से लेकर बाहर तक इनकी संख्या सैकड़ों में है। यहां तक कि दलालों के बाहर में कार्यालय खुले हैं। आरटीओ के बाहर एक किलोमीटर में इन्हीं की दुनिया है।
आम आदमी लेनदेन में दलालों से पंगा करने पर पिटकर यहां से वापस घर जाता है। इसीलिए यहां लोग दलालों के पंगे से बचते हैं। अंदर के अधिकारी और कर्मचारी आम आदमाी से बात नहीं करते हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि वे ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता बढ़वाने के लिए चार दिन आरटीओ गए पर कंपूटर में नेटवर्क न होने की बात बताकर वापस भेज दिए जाते थे। एक दिन हारकर दलाल के पास गए। दलाल एक हजार रुपये अलग से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस घर भेजवा दिया।
इसी विभाग के सम्बंध में एक पूर्व विधायक के पुत्र ने कहा कि उनकी फाइल यहां सीधे जमा हो गई थी। लेकिन काम होने के बजाय फाइल गायब हो गई है। अब उनके पास फोटो कापी बची है। बाकी सुविधा शुल्क बचाने के चक्कर में मूल कागजात गायब हो गए हैं। अमूमन यही हाल प्रतापगढ़ और रायबरेली आरटीओ का भी है।
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From: Jansatta
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