देश में कोरोना संक्रमण के घटते मामले राहत पैदा करने वाले हैं। केरल जैसे कुछेक राज्यों को छोड़ दिया जाए तो बाकी राज्यों में हालात लगभग काबू में हैं। पर इसी बीच फिर से कोरोना विषाणु का एक और नया रूप सामने आ गया है। चिंता की बात ज्यादा इसलिए है कि यह ए वाई-4.2 विषाणु कोरोना के डेल्टा रूप की शृंखला का है और डेल्टा की तरह ही ब्रिटेन से भारत पहुंचा है। माना जाता है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने जो कहर बरपाया था, वह विषाणु के डेल्टा रूप के कारण ही फैली थी। इसलिए यह आशंका बेवजह नहीं कि कहीं नया विषाणु वैसा ही संकट खड़ा न कर दे। भारत में भी ए वाई-4.2 विषाणु के मरीज मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में कुछ लोग इससे संक्रमित मिले हैं।
महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और यहां तक कि जम्मू कश्मीर में भी इसके मामले सामने आए हैं। इससे यह तो साफ है कि भले अभी बहुत ज्यादा मरीज सामने न आए हों, लेकिन विषाणु का यह रूप भी लोगों को अपना शिकार तो बना ही रहा है। केरल में हालात अभी भी गंभीर ही हैं। देश में संक्रमण के रोजाना जितने मामले सामने आ रहे हैं, उनमें आधे से ज्यादा तो केरल से ही हैं। ऐसे में नए विषाणु के खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
ए वाई-4.2 विषाणु ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों के लिए नए संकट के रूप में उभरा है। अकेले ब्रिटेन में पिछले चार दिन में पचास हजार से ज्यादा संक्रमितों का मिलना बताता है कि इसके प्रसार की रफ्तार भी डेल्टा से कम नहीं है। रूस में रोजाना हजार से ज्यादा लोग इससे संक्रमित मिल रहे हैं। इजराइल में भी यह अपना असर दिखा रहा है। यानी जिन देशों ने अपने यहां महामारी की दूसरी-तीसरी लहर से निपटने में जो चुस्ती दिखाई थी और आबादी के बड़े हिस्से का टीकाकरण कर दिया, वहां अब डेल्टा परिवार का यह रूप बड़े पैमाने पर संक्रमण का कारण बन गया है। कोरोना विषाणु को लेकर ज्यादा खौफ इसलिए भी बना हुआ है कि पिछले डेढ़-दो साल में यह विषाणु सैकड़ों रूप बदल चुका है और हर नया रूप संक्रमण के फैलाव और मारक क्षमता में पिछले वाले से ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।
दुनिया में जिन कुछ देशों ने महामारी का सबसे ज्यादा कहर झेला है, उनमें भारत भी है। अमेरिका और ब्राजील के बाद सबसे ज्यादा संक्रमण और मौतें भारत में हुईं। गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में ब्रिटेन से कुछ लोग भारत पहुंचे थे, जो डेल्टा विषाणु से संक्रमित थे। भारत पहुंचने पर ये लोग हवाई अड्डे से बिना जांच करवाए निकल गए थे। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही दिनों बाद देश के कई हिस्सों में डेल्टा रूप वाला संक्रमण फैलना शुरू हो गया और इसका नतीजा दूसरी लहर के रूप में देखने को मिला। इसलिए भारत में अब सतर्कता की जरूरत है।
भले अब दूसरे देशों से आने वाले नागरिकों पर से कोरोना संबंधी प्रतिंबधों में ढील दे दी गई हो, पर यात्रियों की कोरोना जांच में जरा-सी ढिलाई भी बड़े संकट की ओर धकेल सकती है। इन दिनों वैसे भी त्योहारों की वजह से बाजारों में भीड़ बढ़ रही है, इसलिए भी खतरा कहीं ज्यादा बना हुआ है। ऐसे में कोरोना से बचाव संबंधी उपाय और टीकाकरण के अलावा सावधानी ही संकट से बचाएगी।
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From: Jansatta
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