आधुनिक काल की नैतिकता मानव केंद्रित है, जो व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए उसे निर्णय लेने की पूर्व स्वतंत्रता प्रदान करती है। उसे हर जगह खुल कर रहने और कार्य करने की स्वतंत्रता देती है, चाहे कोई भी क्षेत्र हो। उसे स्वेच्छा से अपनी आजादी और विकास करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है। खुद से स्वीकार करने का सबका हक है।
आधुनिक नैतिकता अंतरजातीय संबंधों और मानवीय मूल्यों को नैतिक रूप से समर्थन करता है। अब भी भारतीय समाज मध्यकालीन मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया है, जो मानवकेंद्रित चिंतन, तर्कवाद की कसौटी पर सामाजिक परंपराओं को कसता जाता है।
’समराज चौहान, पूर्वी कार्बी आंग्लांगै असम
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