Thursday, October 28, 2021

अंतरिक्ष से जंग की होड़

अभिषेक कुमार सिंह

अभी दुनिया में अंतरिक्ष से आने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों की चेतावनी देने वाली या उनसे बचाव करने वाली प्रणालियां नहीं हैं। मौजूदा समय में जो वायु रक्षा प्रणालियां उपलब्ध हैं, वे परंपरागत मिसाइलों के खिलाफ ही काम कर पाती हैं। यही नहीं, अंतरिक्ष से दागी गई हाइपरसोनिक मिसाइलों से वायु रक्षा प्रणालियां भी तबाह की जा सकती हैं।

एक मनुष्य के रूप में हम जितनी अधिक शांति की कामना करते हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ी आशंकाएं युद्ध को लेकर हमारे सिर पर सवार रहती हैं। इस समस्या का भयावह सच यह है कि इसके सर्जक भी खुद मनुष्य ही हैं। युद्ध भी अब कोई सामान्य नहीं रह गए हैं। पारंपरिक हथियारों से बात शुरू होकर विशालकाय बमों, परमाणु हथियारों, अंतर-महाद्वीपीय मिसाइलों और साइबर जंग तक जा पहुंची है। हालांकि हर किस्म के हमले से बचाव और हथियारों की काट भी तैयार कर ली जाती है, लेकिन अब कुछ ऐसे युद्धों की भूमिका रची जा रही है जिनका तोड़ खोज पाना आसान नहीं होगा। इस किस्म की नई जंग अंतरिक्ष से महाविनाशक हथियारों की वर्षा के रूप में हो सकती है। अंतरिक्ष युद्ध की होड़ के बारे में ताजा दावा है कि भारत के पड़ोसी चीन ने हाल में पहली बार अंतरिक्ष से धरती पर कहीं भी परमाणु हमला करने की ताकत का परीक्षण कर लिया है।

ताजा घटनाक्रम के मुताबिक इसी साल अगस्त में चीन ने अपने एक ताकतवर राकेट- लांग मार्च से परमाणु हथियार ले जाने और दागने की ताकत से संपन्न हाइपरसोनिक मिसाइल को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा रफ्तार से चलने में सक्षम है। निचली कक्षा में पहुंचने के बाद मिसाइल ने पृथ्वी का चक्कर लगाया और इसके बाद विशेषज्ञों ने निर्धारित लक्ष्य के करीब दागा। अमेरिका की रक्षा मामलों की वेबसाइट- ‘द ड्राइव’ ने इस मिसाइल के परीक्षण का दावा करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें दावा किया गया है कि अब चीन के पास ऐसी शक्तिहै कि निकट भविष्य में वह अपनी मिसाइलों के जरिए अंतरिक्ष से पृथ्वी के किसी भी कोने में परमाणु बम गिरा सकता है।

हालांकि अपने पहले परीक्षण में यह मिसाइल तय लक्ष्य से बत्तीस किलोमीटर दूर गिरी है, लेकिन इस क्षमता को हासिल कर लेने के बाद यह खतरा तो खड़ा हो ही गया कि चीन अपने किसी भी शत्रु पर अंतरिक्ष के रास्ते अचूक हमला कर सकता है। खास बात यह है कि अभी दुनिया में अंतरिक्ष से आने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों की चेतावनी देने वाली या उनसे बचाव करने वाली प्रणालियां नहीं हैं। मौजूदा समय में जो वायु रक्षा प्रणालियां उपलब्ध हैं, वे परंपरागत मिसाइलों के खिलाफ ही काम कर पाती हैं। यही नहीं, अंतरिक्ष से दागी गई हाइपरसोनिक मिसाइलों से वायु रक्षा प्रणालियां भी तबाह की जा सकती हैं। हजारों किलोमीटर दूर से ये मिसाइलें बिना किसी रुकावट के हमला कर सकती हैं। इस बात ने अमेरिका सहित पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है।

जहां तक अंतरिक्ष युद्ध की बात है, तो यह कोई नई बात नहीं है। बीते कई दशकों से दुनिया के कई देशों में अंतरिक्ष जंग के खतरों और तैयारियों को लेकर खाका खींचा जाता रहा है। खुद अमेरिका भी अरसे से इस काम में लगा है। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि सबसे पहले 1983 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने इसी तरह की जंग का सपना ‘स्टार वार’ के रूप में देखा था। हालांकि अमेरिका ने अंतरिक्ष से जंग की योजना पर तुरंत अमल नहीं किया, लेकिन उसके बाद लगभग तेरह साल तक पूरी दुनिया में इस विचार को लेकर आशंका और भय का माहौल बना रहा। रीगन चाहते थे कि पृथ्वी पर जो युद्ध होते हैं, उन पर अंतरिक्ष में तैनात सैनिक उपग्रहों और उपकरणों से इस तरह नियंत्रण पाया जाए कि अमेरिका और उसके मित्र देश हमेशा बढ़त पा सकें।

इस बीच, 1996 में जब बिल क्लिंटन ने स्टार वार योजना को कुछ समय के ठंडे बस्ते में डाल दिया था, तो दुनिया ने चैन की सांस ली थी। पर वर्ष 2018 में एक बार फिर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इस योजना पर दोबारा विचार करने को कहा जाने लगा। इस संबंध में मार्च, 2018 को अमेरिकी रक्षा खुफिया सेवा के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राबर्ट पी. एश्ले जूनियर ने अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने दावा किया कि रूस और चीन ऐसे हथियार विकसित कर रहे हैं जिनका इस्तेमाल वे अंतरिक्ष युद्ध में कर सकते हैं। ऐसे में उन्होंने अंतरिक्ष युद्ध के लिए अमेरिका को तैयार रहने की बात कही।

जब हम अंतरिक्ष से लड़ी जाने वाली जंग के हथियारों का ब्योरा तलाशते हैं, तो दिलचस्प जानकारियां सामने आती हैं। बताते हैं कि अमेरिका ने काफी लंबे समय तक जिस ‘एयरबार्न लेजर प्रोजेक्ट’ पर काम किया है, उसमें कई तरह के हथियारों के बारे में सोचा गया था। इस बारे में यहां तक कहा गया है कि अंतरिक्ष में एटम बम रखे जा सकते हैं। वहां ऐसे उपकरण तैनात हो सकते हैं, जो लेजर किरणें फेंक कर सब कुछ तबाह कर सकते हैं। पार्टिकल बीम यानी खतरनाक आवेशित किरणें और राकेट अथवा गोलियों की तीव्र बौछार फेंकने वाले हथियार तक शामिल हैं। मिसाइलों के अलावा और भी अनेक तरह के हथियार हैं, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी अथवा अंतरिक्ष में ही कहर बरपा सकते हैं।

इनमें गैर-पारंपरिक श्रेणी के ‘फार आउट वैपन’ कहलाने वाले स्पेस बग्स, स्पेस हैकर, ई-बम, प्रोपल्शन सिस्टम, स्पेस फाइटर, एलियन टेक्नोलॉजी और प्लाज्मा हथियार तक शामिल हैं। जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि स्पेस बग्स एक तरह के कीटाणु होंगे, जो अंतरिक्ष से धरती पर उतर कर कोई खतरनाक बीमारी पैदा कर सकते हैं। अंतरिक्ष सेंधमारों (स्पेस हैकर) के जरिए उपग्रहों से लेकर पृथ्वी पर स्थित संचार तथा विद्युत प्रणालियों को ठप किया जा सकता है। पर अमेरिका जिन प्रणालियों पर गंभीर रूप से विचार कर रहा है, वे कल्पना की जमीन से थोड़ा अलग हैं। अमेरिका के रक्षा विभाग की वायु सेना इकाई ने स्टार वार की योजना में एक ऐसी मिसाइल प्रतिरक्षण प्रणाली की चर्चा की है, जिसे हमले की सूचना पाते ही शत्रु देश की तरफ दागा जा सकता है और अपनी ओर आने वाले युद्धक विमान या मिसाइल को भी अंतरिक्ष में तैनात प्रणालियों से ही नष्ट किया जा सकता है।

यहां महत्त्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि पड़ोसी चीन के पास अंतरिक्ष से मिसाइल की क्षमता आ जाएगी, तो भारत उसकी ताकत का मुकाबला कैसे कर पाएगा। निश्चित ही चीन के अंतरिक्ष में हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात करने से अमेरिका ही नहीं भारत के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन की सैन्य घुसपैठ की कोशिशों को देखते हुए जरूरी है कि भारत के पास इस ब्रह्मास्त्र के मुकाबले की शक्ति हो। इस बारे में आश्वस्ति यह है कि हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा ऐसा देश जिसके पास हाइपरसोनिक तकनीक है और इसका परीक्षण भी किया जा चुका है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कुछ समय पहले ओड़ीशा के बालासोर में हाइपरसोनिक टेक्नोलाजी डिमांस्ट्रेटर वेहिकल का सफल परीक्षण किया था। दावा है कि ध्वनि की रफ्तार से छह गुना ज्यादा गति से चलने वाले इस वाहन की भनक हमारे शत्रु देशों को नहीं लग पाई थी। इस तरह भारत अब बिना विदेशी सहयोग के हाइपरसोनिक मिसाइलें बना सकता है। यही नहीं, वर्ष 2019 में भारत ने मिशन शक्ति के तहत अंतरिक्ष में तैनात अपने एक मौसमी उपग्रह को जिस तरह धरती से दागी गई मिसाइल से नष्ट किया था, उससे यह भरोसा जगता है कि अंतरिक्ष युद्ध की चुनौती मिलने पर भारत मुकाबले में पिछड़ने वाला नहीं है।

The post अंतरिक्ष से जंग की होड़ appeared first on Jansatta.



From: Jansatta

Read Full Post ㅡ https://ift.tt/3CpMYD3

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार...

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार... From: ABP Live Read Full Post ㅡ htt...