पिछले कुछ समय से भाजपा सांसद वरुण गांधी जिस तरह पार्टी लाइन से अलग, निष्पक्ष विचार व्यक्त करते नजर आ रहे थे उसके बाद से लग रहा था कि देर-सवेर इसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर भाजपा ने इसका स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी के भीतर स्वतंत्र विचारधारा का कोई स्थान नहीं है। वरुण गांधी के साथ उनकी मां मेनका गांधी को भी कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ का राग अलापने वाली भाजपा ने सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की भी छुट्टी कर दी है।
किसानों को कुचल कर मारने के स्पष्ट साक्ष्य के मिलने के बाद, वरुण ही क्यों, हर न्यायप्रिय इंसान को यही ट्वीट करना चाहिए था ‘वीडियो क्रिस्टल स्पष्ट है, प्रदर्शनकारियों को हत्या के माध्यम से चुप नहीं कराया जा सकता।’ ताज्जुब होता है, जो पार्टी आंतरिक लोकतांत्रिक होने का ढिंढोरा पीटती नहीं थकती, वह एक सच्ची आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर
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