बिहार के भागलपुर में शुक्रवार को शुरू हुए मंजूषा महोत्सव के बैनर पर पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें नहीं होने पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। बैनर पर सिर्फ राज्य के उोोन की ही तस्वीर लगी थी। खास बात यह है कि सरकारी स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में पीरपैंती के भाजपा विधायक ललन पासवान के अतिरिक्त कोई अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मौजूद भी नहीं था। एक हफ्ते तक चलने वाले इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह पर विशिष्ट लोगों की नामौजूदगी पर मंत्री जी ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग नहीं आए हैं उन्हें मंजूषा कला से प्रेम नहीं है।
महोत्सव का आयोजन उपेंद्र महारथी अनुसंधान संस्थान और उद्योग महकमा ने मिलकर किया है। जिले के सैंडिस कंपाउंड में 23 से 30 अक्तूबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार खादी और सिल्क उद्योग के मामले में अग्रणी बन रहा है। हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट में आमूलचूल परिवर्तन हो रहा है। बिहार में जल्द ही भागलपुर, नालंदा, पटना और गया शहरों में हैंडलूम एक्सपो आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझे बिहार की समृद्धि के लिए भेजा है।
उपेंद्र महारथी अनुसंधान संस्थान का पटना में 30 करोड़ रुपए की लागत से बड़ी इमारत बन रही है। पटना आने वालों के लिए यह आकर्षण का केंद्र होगा। बिहार खादी बोर्ड के निदेशक अशोक सिंहा इसके कर्ता-धर्ता हैं। उद्योग विभाग के तकनीकी निदेशक पंकज दीक्षित, भागलपुर उद्योग विभाग के महाप्रबंधक रामशरण राम भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि दस साल पहले मंजूषा कला की पहचान स्थानीय स्तर पर ही थी। अब यह देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही मारीशस तक में जानी जाती है। इसमें नाथनगर की चक्रवर्ती देवी का बड़ा योगदान है। इस मौके पर उद्योग विभाग ने राज्य स्तर के आठ कलाकारों को अवार्ड दिया है। भागलपुर में बुनकर प्रशिक्षण केंद्र की सात करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इमारत में छात्रावास भी बनेगा।
मंत्री शाहनबाज हुसैन ने कहा कि बिहार में खादी के दिन फिर चुके है। इसकी मिसाल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अपने परिवार के साथ पटना खादी बोर्ड पहुंचकर कपड़े खरीदना है। उन्होंने मधुबनी खादी तथा उनकी पत्नी और बेटी ने भागलपुरी सिल्क साड़ी खरीदी हैं। कहा कि पिछली बार 250 बुनकरों को दस-दस हजार रुपए की कार्यशील पूंजी दी थी। इस दफा भी इतने ही बुनकरों के बीच यह राशि दी जाएगी। वह ऋण नहीं है। गरीब बुनकरों को मदद है। कहा कि भागलपुर से गहरा रिश्ता है। मंजूषा कला को सात साल पहले उद्योग विभाग ने अपने अधीन लिया था। आज इसे जियो टेक मिल चुका है। यह अब हेरिटेज का रूप ले चुका है।
कार्यक्रम में दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष एसए जावेद, महाप्रबन्धक नीरज कुमार मौजूद थे। पंडाल में मंजूषा कला से जुड़े शिल्पकारों ने स्टाल भी प्रदर्शनी के तौर पर लगाए है। खादी और सिल्क के भी स्टाल लगे हैं। वहां बिक्री के लिए भी सामान उपलब्ध है।
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From: Jansatta
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