Friday, October 22, 2021

राजनीति के बदलते सुर

सिद्धू पर बदले सुर
पंजाब कांग्रेस प्रभारी पद से मुक्ति पाने की कोशिश में कामयाब हुए हरीश रावत जाते-जाते कई विवाद पैदा कर गए। किसी समय में नवजोत सिद्धू को कांग्रेस का भविष्य बताने वाले हरीश रावत के सुर सिद्धू के प्रति पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर नेतृत्व से पंजाब प्रभारी का पद छोड़ने की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि जब नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के पद से इस्तीफा दे दिया था तो उसे मंजूर किया जाना चाहिए था। इससे हाईकमान का स्पष्ट संदेश जाता है।

हरीश रावत बीते तीन महीनों से लगातार कांग्रेस नेतृत्व से खुद को इस जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने का आग्रह कर रहे थे। जब फिर प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू और मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के बीच विवाद गहरा गया तो रावत ने हाथ खड़े कर दिए थे। उत्तराखंड में भी विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में रावत खुद को पंजाब के घमासान से दूर करके उत्तराखंड में समय देना चाहते हैं और उनकी यह इच्छा पूरी भी कर दी गई है। अब पंजाब कांग्रेस की कमान हरीश चौधरी को देने का एलान हुआ है।

लौटे वफादार
मंडी संसदीय हलके से चुनावी चक्रव्यूह में फंसी हालीलाज कांग्रेस की मुखिया व पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को इस भंवर से निकालने के लिए सात समंदर पार फंसे इस परिवार के सबसे वफादार सिपाही पूर्व नौकरशाह सुभाष आहलुवालिया देश लौट आए हैं। आहलुवालिया एक अरसे से विदेश में फंसे हुए थे। कोविड की वजह से वह देश नहीं लौट पा रहे थे। वह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के मौके पर भी नहीं पहुंच पाए थे। इस बीच उपचुनावों का एलान हो गया व प्रतिभा सिंह चुनाव मैदान में कूद गईं।

आहलुवालिया की कमी हालीलाज परिवार ही नहीं बाकी कांग्रेसियों को भी बहुत ज्यादा खल रही थी। लेकिन अब वह देश लौट आए हैं तो प्रतिभा सिंह ने राहत की सांस ली है। यह आहलुवालिया हैं जो हालीलाज के पार्टी के भीतर व पार्टी के बाहर एक-एक दुश्मन और दोस्त को जानते हैं। उन्हें कैसे संभालना है वे यह भी बखूबी जानते हैं। अभी मतदान के लिए सप्ताह भर बचा है। ऐसे में आहलुवालिया का जलवा भी भाजपा देखेगी।

दागी की दलील
भाजपा की हालत यह हो गई है कि वह अपनी साख बचाने के उल्टे सीधे हथकंडों और हास्यास्पद पैतरों पर उतर आई है। हालत यह है कि पार्टी ने एक ऐसे नेता को चुनावी प्रचार के लिए उतार रखा है जिन पर पत्नी के साथ घरेलू हिंसा के आरोप हैं। मामला कांगड़ा जिले के फतेहपुर हलके का है। भाजपा के यह विवादित नेता वोट के लिए लोगों के सामने हाथ जोड़ते फिर रहे हैं और पीछे से जनता उन पर फब्तियां कस रही है कि ‘यह वही है न जिसकी मारपीट से बीवी ससुराल से मायके भागने पर मजबूर हो गई’।

जाहिर है, दिल ही दिल में कांग्रेस धन्य है कि जानते-बूझते भाजपा इन्हें प्रचार में लाई। सो कहने की जरूरत नहीं कि उसी ढोल के बोल अब एक दफे फिर से फतेहपुर उपचुनाव में गूंज रहे हैं और सबसे अलग होने का दावा करने वाली पार्टी के एक नेता की बातों पर जनता चटकारे ले रही है।

वापसी का मोर्चा
उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह बागी कांग्रेसी नेताओं को फिर से पार्टी में शामिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। उनके प्रयासों से दलित नेता और भाजपा सरकार में ताकतवर मंत्री रहे यशपाल आर्य फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। राहुल गांधी ने इसके लिए प्रीतम सिंह की पीठ थपथपाई। यह सब बागी नेता हरीश रावत के मुख्यमंत्री काल में उनसे नाराज होकर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। अब इन नेताओं के कांग्रेस में आने की खबर से हरीश रावत परेशान हैं। हरीश रावत आए दिन कांग्रेस के इन बागी नेताओं के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं। हरक सिंह रावत ने भी हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

प्रियंका का पासा
प्रियंका गांधी ने देश के सबसे बड़े सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है। पहले महिलाओं को विधानसभा चुनाव में चालीस फीसद टिकट देने के एलान से और फिर छात्राओं को इंटर पास करने पर स्मार्ट फोन व स्नातक की पढ़ाई करने पर ई-स्कूटी देने का चुनावी वादा कर बाकी दलों की बोलती बंद कर दी है। प्रियंका गांधी पार्टी महासचिव के नाते उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। दलितों पर उनका फोकस कुछ ज्यादा रहा है। यह जानते हुए भी कि बड़ी तादाद दलितों में जाटव मतदाताओं की है, जो बसपा के समर्थक माने जाते हैं।

प्रियंका की कोशिशें मायावती को परेशान करती हैं। केंद्र और सूबे की सत्ता में भाजपा है, पर मायावती हमले लगातार कांग्रेस पर बोल रही हैं। कहीं न कहीं उनके मन में यह डर समा चुका है कि दलित वोट बैंक छिटक कर कांग्रेस के पाले में न चला जाए। पंजाब में दलित मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने सबको चौंकाया है। देश का पहला दलित राष्टÑपति बनाने का श्रेय भी कांग्रेस के खाते में है। मायावती जिस तरह भाजपा के प्रति नरम रुख अपना रही हैं, उससे कहीं न कहीं सूबे के दलितों में उनको लेकर भी निराशा का भाव है। इसलिए महिलाओं को चालीस फीसद टिकट देने के एलान को मायावती ने सबसे पहले नौटंकी बताया।

(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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From: Jansatta

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