विमानन कंपनी एयर इंडिया ने प्राइवेट होते ही एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत वह अब केंद्र सरकार के किसी मंत्रालय या विभाग को उधार में टिकट नहीं देगी।
ऐसे में वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और केंद्र सरकार के विभागों को निर्देश दिया है कि वे एयर इंडिया के बकाए का भुगतान करें और एयरलाइन से टिकट को कैश में खरीदें। ये जानकारी एयर इंडिया ने दी है। इस बारे में वित्त मंत्रालय ने मेमोरेंडम भी जारी किया है।
गौरतलब है कि एयर इंडिया अब प्राइवेट हो गई है और कुछ दिनों पहले ही टाटा समूह ने इसको खरीद लिया है। ऐसे में उन अधिकारियों को बड़ी परेशानी होगी, जोकि अब तक सरकारी खर्च पर यात्रा करते थे।
दरअसल साल 2009 में एयर इंडिया में ये सुविधा थी कि भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों के अधिकारी सरकारी खर्च पर यात्रा कर सकते थे, फिर चाहें वो घरेलू उड़ान हो या इंटरनेशनल। बाद में टिकट के खर्च को सरकार और एयर इंडिया के बीच सेटल कर दिया जाता था, ऐसे में सरकार के ऊपर एयर इंडिया का काफी बकाया निकल रहा है। इसीलिए वित्त मंत्रालय ने मेमोरेंडम जारी करके इस बकाया का भुगतान करने और आगे से कैश में टिकट खरीदने का निर्देश मंत्रालयों और विभागों को दिया है।
टाटा समूह के पास एयर इंडिया के जाने के बाद कंपनी ने क्रेडिट सुविधा को बंद कर दिया है, जिसके बाद सरकारी विभागों और मंत्रालयों को नकद में ही टिकट खरीदना होगा।
क्या है एयर इंडिया का इतिहास
एयर इंडिया पहले टाटा ग्रुप की ही कंपनी थी, जिसकी स्थापना जेआरडी टाटा ने साल 1932 में की थी। लेकिन जब 1947 में आजादी मिलने के बाद इसका राष्ट्रीयकरण हुआ तो टाटा एयरलाइंस ने इसके 49 फीसदी शेयर खरीद लिए।
साल 1953 में सरकार ने इस कंपनी के फाउंडर जेआडी टाटा से मालिकाना हक खरीद लिया था। जिसके बाद कंपनी का नाम एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड हो गया। अब 68 साल बाद कंपनी का मालिकाना हक फिर से टाटा ग्रुप को मिल गया। इससे पहले साल 2018 में भी एयर इंडिया को बेचने की कोशिश सरकार ने की थी। लेकिन सरकार की ये कोशिश नाकाम हो गई थी।
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From: Jansatta
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