Friday, September 24, 2021

जीवन की शिक्षा

शिक्षा का मकसद लोगों की तरक्की है, ताकि वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से समाज के नजरिए और आदर्शों को आगे ले जाने में अहम योगदान दे सकें। अगर हम थोड़े जरूरी नजरिए से बात करें तो शिक्षा एक ऐसा सूरज है जो अपना प्रकाश मनुष्य पर डालता है और इससे प्रवर्तित किरणें न केवल परिवार, समाज, देश, बल्कि सारी दुनिया को चमकाती है। शिक्षा मनुष्य के अंदर एक ऐसा इत्र है जो अपनी खुशबू से समाज को सुगंधित करती रहती है। यह हमें जीवन जीने की उच्चतम शैली सिखाती है, लेकिन हम सिर्फ रोजगार के लिए शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो शिक्षा का एक लेन-देन वाला पहलू दिखता है।

जब शिक्षक केवल परीक्षा में पास के लिए पढ़ाते हैं, तो वे विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति प्रेम जगाने की जगह उन्हें परीक्षा के लिए तैयार करने की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ऐसे कई विद्यार्थी होते हैं, जो परीक्षा ‘क्रैक’ करना जानते हैं और उन्हें अच्छे-खासे नंबर मिलते हैं। लेकिन वे सीखना पसंद नहीं करते हैं। विद्यार्थियों के माता-पिता अंकों को उनकी सफलता का सबूत और पैमाना मानते हैं। इससे शिक्षा सिर्फ एक लाभदायक व्यवसाय बन जाती है, लेकिन यह सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने में विफल रहती है।

हर एक माता-पिता को चाहिए कि बच्चों के नंबर को सफलता का सबूत या पैमाना न मानें, उनके मस्तिष्क को टटोलें कि उसने कितनी शिक्षा प्राप्त की। तब जाकर शिक्षा की प्राप्ति के प्रति हर विद्यार्थी की ललक जगेगी। आज हमारे भारत में बहुत सारे ऐसे विद्यार्थी हैं जो इंजीनियरिंग, डॉक्टरी आदि की डिग्रियां लेकर ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं। फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ परीक्षा ‘क्रैक’ करने पर ध्यान दिया, शिक्षा प्राप्त करने पर नहीं। इसलिए सभी विद्यारथियों को ईमानदारी से यह सोचना चाहिए कि वास्तविक शिक्षा क्या है!
’इकबाल राजा, मधेपुरा, बिहार

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From: Jansatta

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