Tuesday, September 14, 2021

महंगाई की मार

थोक महंगाई का लगातार बढ़ना बता रहा है कि फिलहाल महंगाई से राहत नहीं मिलने वाली। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार थोक महंगाई 11.39 फीसद रही। पिछले महीने यह 11.16 फीसद थी। चिंता की बात ज्यादा इसलिए है कि यह लगातार पांचवा महीना है जब थोक महंगाई दो अंकों में बनी हुई है। इससे पहले सोमवार को खुदरा महंगाई के आंकड़े भी आए। खुदरा महंगाई 5.3 फीसद रही, जो जुलाई में 5.59 फीसद रही थी। मामूली-सी इस कमी से खुश नहीं हुआ जा सकता। थोक महंगाई में बढ़ोतरी को भी मामूली मान कर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कुछ दशमलव महंगाई का बढ़ना भी आम आदमी की जेब पर भारी असर डाल देता है। महंगाई चाहे थोक हो या खुदरा, है तो महंगाई ही और पैसा आम आदमी की जेब से ही निकलता है।

थोक महंगाई बढ़ने के पीछे कारण गैर-खाद्य वस्तुओं, कच्चे तेल, पेट्रोल व डीजल, प्राकृतिक गैस, धातुओं, उत्पादों, खाद्य उत्पादों, कपड़े, रसायनों और रासायनिक उत्पादों के दाम बढ़ना बताया गया है। यानी सब कुछ महंगा हुआ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि महामारी की वजह से पिछले डेढ़ साल में बिजली, कोयला, पेट्रोलियम व गैस, सीमेंट, खनन जैसे अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों तक में उत्पादन पर भारी असर पड़ा। बड़े कारखानों से लेकर छोटे उद्योगों तक की हालत खराब हो गई। मांग-आपूर्ति चक्र टूट गया। आबादी के बड़े हिस्से के पास पैसे और रोजगार का संकट खड़ा हो गया। अब जब पिछले कुछ महीनों से सब कुछ पटरी पर आने का दावा किया जा रहा है तो महंगाई पीछा नहीं छोड़ रही। उद्योगों ने उत्पादन की लागत बढ़ा दी है।

इसके पीछे तर्क कच्चे माल की कमी, कोयले और बिजली के दाम बढ़ने का दिया जा रहा है। फिर पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों ने महंगाई बढ़ाने में बड़ी कोई कसर नहीं छोड़ी। रसोई गैस लगातार महंगी हो रही है। खाद्य तेलों के दाम पिछले एक साल में साठ फीसद से भी ऊपर चले गए हैं।

बात खुदरा महंगाई की हो या थोक की, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों ने आग में घी का काम किया है। इनके महंगा होने से पहला असर माल ढुलाई पर पड़ता है। ढुलाई महंगी होते ही लागत बढ़ती है। जब तैयार माल कारखानों से थोक विक्रेताओं के पास आता है तो थोक महंगाई बढ़ती है। थोक विक्रेताओं से जब खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं तक पहुंचता है तो खुदरा महंगाई बढ़ना भी लाजिमी है। सवाल यह है जनता को महंगाई से निजात दिलाने का बेहतर विकल्प क्या पेट्रोल और डीजल पर वसूले जाने वाले शुल्क में कटौती नहीं हो सकता था? लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों को यह तरीका रास इसलिए नहीं आ रहा क्योंकि उन्हें जनता के बजाय अपना खजाना भरने की चिंता ज्यादा दिखती है।

दरअसल सरकारें यह अच्छी तरह समझती हैं कि दाम चाहे कितने ही क्यों न बढ़ा दिए जाएं, खाने-पीने और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें खरीदना लोगों की मजबूरी है। महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक भी समय-समय पर चिंता जताता रहा है। कहने को बीते दो महीनों में खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक के दो से छह फीसद के दायरे में आ गई है। लेकिन व्यावहारिक धरातल पर देखें तो लोगों की जेब से पैसा तीन पहले जैसा ही निकल रहा है। थोक महंगाई का रुख ऊपर जाने वाला ही बना हुआ है। ऐसे में आम आदमी के लिए आने वाले दिन और मुश्किलों भरे ही होंगे।

The post महंगाई की मार appeared first on Jansatta.



From: Jansatta

Read Full Post ㅡ https://ift.tt/3AcUtMu

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार...

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार... From: ABP Live Read Full Post ㅡ htt...