मध्यप्रदेश के दमोह जिले के एक गांव मे बारिश न होने पर बच्चियों को बिना कपड़ों के गांव में घुमाने का मामला सामने आया है। यूं तो देश के कोने-कोने में बारिश के लिए नाना प्रकार के टोने-टोटके किए जाते हैं। लेकिन लड़कियों को निर्वस्त्र कर घुमाना न केवल निदंनीय, बल्कि अक्षम्य अपराध है। इक्कीसवीं सदी के भारत में ऐसी घटनाएं हमारी शैक्षिक प्रगति व विकास पर बदनुमा दाग हैं।
यह विडंबना है कि इतने शैक्षिक विकास व प्रगति के बाद भी हमारे ग्रामीण अंचल अंधविश्वास व दकियानूसी विचारों में जकड़े पड़े हैं और हम इन्हें दूर नहीं कर पाए हैं। यह हमारी शिक्षा की प्रगति पर गंभीर प्रश्न चिन्ह होने के साथ सबसे बड़ी हार है! केवल कानूनी कार्रवाई या सजा ही ऐसी समस्याओं का समाधान नहीं है, अपितु ऐसी दकियानूसी मान्यताओं, प्रचलित अंधविश्वासों व टोटको को दूर करने के कारगर शैक्षिक जागरूकता के प्रयास प्राथमिकता के साथ तेजी से होना चाहिए।
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन
हठधर्मिता का नतीजा
नौ महीने से चल रहे किसान आंदोलन को वापस लेने के लिए ग्यारह दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन समाधान कोई नहीं निकला। आंदोलन को कमजोर करने के बजाय समाधान खोजने के प्रयास जारी रखे जाते तो अब तक कोई न कोई समाधान निकल सकता था। लेकिन दोनों ही पक्ष जिस तरह से अड़ कर बैठ गए हैं, उससे गतिरोध बढ़ता ही जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के दखल का भी कोई सकारात्मक नतीजा नहीं दिखा।
अब किसान संगठनों ने 27 सितंबर को भारत बंद का एलान किया है। किसानों को आतंकवादी और देशद्रोही कहने से आंदोलन को हवा मिल रही है। यदि किसानों को लेकर केंद्र लचीला रुख नहीं अपनाता है तो यह आंदोलन सरकार को बड़ा सबक दे सकता है। इसलिए आंदोलन को कमजोर करने के बजाय इसके समाधान के प्रयासों पर जोर होना चाहिए।
’बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, तराना, उज्जैन
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