Sunday, September 5, 2021

नई उम्मीद का उद्यम

प्रेम प्रकाश

अर्थ और उद्योग जगत के साथ अच्छी बात यह है कि वह किसी भी तरह की रूढ़ि और पूर्वाग्रह को बुनियादी तौर पर नहीं मानता है। यही कारण है कि एक ऐसे दौर में जब कोरोना महामारी ने लोगों के सामने कई तरह के संकट खड़े किए हैं तो देश में नव-उद्यम का चातुर्दिक विस्तार रोजी-रोजगार से लेकर आर्थिक ढांचे की मजबूती तक एक दृढ़ भरोसे का आधार बनता जा रहा है।

गुलाम भारत में खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले हल के एक फाल के निर्माण के साथ उद्योग के क्षेत्र में उतरने वाले लक्ष्मणराव किर्लोस्कर कहा करते थे कि हर उद्यम तब तक एक जोखिम है जब तक आप ईमानदार और जिम्मेदार सोच के साथ उस पर खरा उतरने के लिए शिद्दत से कोशिश नहीं करते हैं। किर्लोस्कर की कही यह बात आज कारोबारी जगत के लिए कामयाबी के सूत्र गढ़ने वाले अक्सर दोहराते हैं। कुछ ही दिनों में कुबेरी कामयाबी के शिखर तक पहुंचने की प्रेरणा देने और बिक्री के नए रिकॉर्ड का दावा करने वाली किताबों के तो पहले-दूसरे सफे पर ही इस तरह की बातें लिखी होती हैं। आज हम जिस दौर में हैं वहां हर क्षेत्र में सफलता के जो नए सुलेख रचे जा रहे हैं, वे बड़े जोखिमों को उम्मीद और कामयाबी में बदलने की खूबसूरत दास्तान हैं। खासतौर पर बीते कुछ सालों में तैयार हुए नए कारोबारी संसार में बहुत कुछ नया और सुंदर हुआ है। ये नवीनता और सुंदरता इसलिए भी खास हैं कि ये कारोबारी सफलता के साथ हमारे नैतिक-सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ते हैं।
संभावना और दमखम

भारत आज कई वजहों से दुनिया में एक अद्वितीय स्थान रखता है। खासतौर पर सबसे कम उम्र की आबादी में से एक होना एक ऐसी चमकदार और उम्मीद से भरी बात है, जो दुनिया के आगे भारत को एक बड़ी संभावना और दमखम के तौर पर सामने रखता है। कामकाजी आयु वर्ग की 62 फीसद आबादी और 25 साल से कम उम्र की 54 फीसद आबादी के साथ कारोबारी नवाचार के कई सफल प्रयोगों के साथ हमारा देश आज अर्थ और समाज के बीच के कई दुर्भाग्यपूर्ण विरोधाभासों को बेमानी करार दे रहा है, उन्हें मिटा रहा है। खासतौर पर देश में उद्यमशीलता व रोजगार को बढ़ावा देने में स्टार्टअप योजना की सफलता यह दिखाती है कि हमारे युवा हुनरमंद ही नहीं हैं बल्कि उनकी दृष्टि और कोशिश नए और सबल भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहने की है।
महामारी के दौर में

कोरोना महामारी के दौर में जब एक तरफ कई औद्योगिक परिसरों पर ताले झूलने शुरू हुए और देखते-देखते महानगरों की सड़कों पर बेकार हुए कामगारों का हुजूम उतर आया, वहीं दूसरी तरफ नव-उद्यम के कई ऐसे छोटे-बड़े प्रयोग भी इसी दौरान शुरू हुए जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिला। महामारी के बीच भारतीय स्टार्टअप ने परीक्षण किट और वेंटिलेटर से लेकर रिमोट मॉनिटरिंग और निवारक तकनीकों के साथ-साथ आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, रसद और शिक्षा में नवाचारों के लिए स्वदेशी, तकनीक-सक्षम समाधान प्रदान करने के सफल प्रयोग किए।

इसी दौरान प्रौद्योगिकी के माध्यम से लाए गए प्रतिमानों के बदलावों का एक नया दौर भी शुरू हुआ, जिसमें आॅनलाइन शिक्षा के लिए साधन और संसाधन का विस्तार सबसे अहम है। भारत में स्टार्टअप को मिल रही कामयाबी और विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 180 दिनों में देश में दस हजार स्टार्टअप पंजीबद्ध हुए। सबसे ज्यादा फूड प्रोसेसिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, आइटी कंसलटेंसी के क्षेत्रों के स्टार्टअप आए।
लैंगिक समकोण

दिलचस्प है कि देश में शुरूहुए 45 फीसद स्टार्टअप ऐसे हैं, जिनकी कमान महिला उद्यमियों के हाथों में है। यह एक ऐसा तथ्य है जो देश में अपने तरीके से लैंगिक समानता का इतिहास लिख रहा है। एक ऐसे दौर में जब महिलाओं के लिए कॉर्पोरेट जगत अब भी खासा सिमटा हुआ है, यह कामयाबी भविष्य की आशाओं से भरी है। ‘सीएस जेंडर- 3000’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में कंपनी की बोर्ड टीम में महिलाओं की भागीदारी में केवल 4.3 फीसद का बढ़ोतरी हुई है। 2019 में उनका प्रतिनिधित्व 2014 के मुकाबले 10.9 फीसद से बढ़कर 15.2 फीसद पर पहुंचा है, जबकि वैश्विक औसत 20.6 फीसद है।

दिलचस्प है कि स्टार्टअप योजना शुरू होने के 808 दिनों में दस हजार से अधिक स्टार्टअप सामने आ गए थे। योजना के पहले 2016-2017 में कुल 743 स्टार्टअप को मान्यता दी गई थी। बीते वित्त वर्ष 2020-2021 में 16,000 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता मिली है, जो भारत में स्टार्टअप की तेजी को दर्शाता है। 2020-21 के दौरान स्टार्टअप ने करीब 1.7 लाख नौकरियां उपलब्ध कराई हैं। उपलब्धियों के इस ब्योरे में लैंगिक खाई को पाटने के कई ऐसे प्रेरक उदाहरण भी शामिल हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र में लैंगिक दुराग्रह की हकीकत को बदलाव की नई शक्ल दे रहे हैं।
623 जिलों में विस्तार

16 जून 2016 को ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत हुई थी। इस योजना के आगाज के साथ मान्यता प्राप्त स्टार्टअप का विस्तार 623 जिलों तक हो चुका है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गुजरात में यह संख्या सबसे ज्यादा है। इस दौरान 30 से अधिक प्रदेशों ने स्टार्टअप शृंखला को समर्थन देने के लिए खास नीतियों की घोषणा की है। तीन जून, 2021 तक डीपीआइआइटी की ओर से 50,000 स्टार्टअप को मान्यता दी गई है, जिनमें से 19,896 स्टार्टअप को एक अप्रैल, 2020 के बाद मान्यता मिली है। नव-उद्यम के साथ विकसित हो रहा यह ढांचा तेजी के साथ देश के हर हिस्से में आर्थिक समृद्धि का एक नया आधार तैयार कर रहा है।

The post नई उम्मीद का उद्यम appeared first on Jansatta.



From: Jansatta

Read Full Post ㅡ https://ift.tt/3h1uBeL

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार...

CM सम्राट पर भड़के भाई-बहन, तेजस्वी यादव ने बताया 'Cheap Minister', मीसा बोलीं- ये सरकार... From: ABP Live Read Full Post ㅡ htt...