Sunday, September 12, 2021

हड़बड़ी का शोक

दिल्ली भाजपा में पिछले कई दिनों से अजीबो गरीब वाकये सामने आ रहे हैं। अब हाल ही में हुई पार्टी की प्रदेश महिला कार्यकारिणी की बैठक में लोग चौंक गए। दरअसल, बैठक की शुरुआत में उन नेताओं को श्रद्धांजलि दी गई जिनकी हाल के दिनों में मौत हुई है। पार्टी के नेता ऐसे लोगों का नाम लेकर शोक संदेश पढ़ रहे थे। तभी उन्होंने जल्दी-जल्दी में उन नेताओं का नाम भी पढ़ डाला जो जीवित थे। फिर क्या, जिसने भी सुना वो या तो चौंका या फिर अपनी हंसी दबाकर बैठा रहा। बाद में कार्यकारिणी के दौरान ही प्रदेश के एक पदाधिकारी ने जानकारी को दुरुस्त किया तो जिन्हें नहीं पता था वे भी गड़बड़ी से वाकिफ हो गए।
कड़ाई और भलाई

पुलिस विभाग के मुखिया ने कई ऐसे काम कर रहे हैं जिससे जवानों में जहां एक तरफ खुशी दिख रही है तो वहीं कुछ अधिकारियों में मायूसी है। बताया जा रहा है कि मुखिया ने उन तमाम मांगों, सुविधाओं और कार्यप्रणाली पर काम शुरू कर दिया है जो लंबे समय से लंबित और प्रतिक्षित था। लेकिन इसी बीच वे कड़ाई भी कर रहे हैं। इससे उन अधिकारियों और कर्मचारियों की हालत पस्त है जो ड्यूटी के नाम पर मौज करते हैं। बेदिल को पता चला कि कुछ कर्मी तो सुबह की सैर के दौरान ही बायोमीट्रिक उपस्थिति लगाकर मन माफिक समय पर दफ्तर आते थे और फिर सरकारी गाड़ी से खरीदारी कर मौज करते थे। वही कुछ ड्यूटी के नाम पर सिर्फ घर के ही काम निपटाते थे। उनके लिए भलाई पर ये कड़ाई भारी है।
हाल-ए-सदन
नगर निगम के सदनों में जब आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है तो पार्षद अपनी और दूसरों की छोड़िए सदन की गरिमा तक भूल जाते हंै। हंगामें के दौरान कभी-कभी बात इतनी बिगड़ जाती है कि उनके अस्त्र और शस्त्र तर्क को छोड़कर कागज के गोले और जूते चप्पल में बदल जाते हैं। इस दौरान व्यक्तिगत टिप्पणी और लांछन भी लगाने से जनप्रतिनिधि पीछे नहीं रहते। पिछले दिनों पूर्वी निगम में ऐसी ही दृश्य देखने को मिला तो बेदिल ने वरिष्ठ पार्षदों को कहते सुना कि जब सदन में अपराधी प्रवृत्ति के लोग जीतकर आएंगे तो सदन में ऐसे दृश्य देखने को न मिले यह कैसे संभव है।
हटा जब पर्दा
दिल्ली से सटे नोएडा में कोरोना काल के दौरान सड़क पर रेहड़ी पटरी दुकानदारों को व्यवस्थित करने के लिए आनन-फानन में वेंडर जोन योजना लागू की गई। पूर्णबंदी के दौरान तो ऐसा लग रहा था जैसे व्यवस्था बिल्कुल ठीक है और मिशन सफल हो गया, लेकिन जैसे ही पूर्णबंदी हटने के साथ यातायात सड़कों पर लौटने लगा तो पूरी तैयारी ढह गई। यह वैसे ही है जैसे किसी नाटक का पर्दा उठे और मंच पर सबकुछ अव्यवस्थित दिखे। वेंडर जोन होने से व्यस्त मार्गों पर लंबा जाम लगने लगा और यातायात पुलिसकर्मी प्राधिकरण के लोगों को कोसते दिखे। यहां प्राधिकरण ने सुलभ रोजगार के नाम पर वेंडर जोन तो बनाए लेकिन रास्ते कम चौड़े होने से यहां सड़क पर वाहन खड़ा कर खरीदारी करने वाले ज्यादा दिखते हैं। इससे जाम लगता है। पुलिस जब सख्ती दिखाती है तो दुकानदारों का विरोध शुरू हो जाता है। ऐसे में व्यवस्था कैसे काबू होगी, यह प्राधिकरण ही जानता है।
खींच मेरी फोटो
आपदा को अवसर बनाने में केवल राजनीतिक पार्टियां ही नहीं बल्कि एक किसान नेता भी आगे हैं। बीते दिनों झमाझम हुई बारिश में वे गाजीपुर में न केवल धरने पर बैठे रहे बल्कि जब पानी कमर तक आया तो भी मजबूती के साथ धरनास्थल पर ही डटे रहे। मीडिया को बुलाया गया। खबर वायरल की गई कि सिसौली गांव वाले ये ‘नेताजी’ भले डूब जाएंगे लेकिन हटेंगे नहीं। फोटो शूट संपन्न होने के बाद ही गाजीपुर धरना के अगुआ रहे उस किसान नेता ने हठ छोड़ा और गिले कपड़े बदलने के नाम पर बाहर आए। लेकिन इससे पहले जमा हुए पानी में बैठकर, लेटकर और फिर खड़े होकर फोटो खिंचवा चुके थे। कहना न होगा कि ‘नेताजी’ के सिपहसलाकारों की योजना सफल रही। अगले दिन कई स्थानीय अखबारों से लेकर सोशल मीडिया में नेताजी छाए रहे।
– बेदिल

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From: Jansatta

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