किसी ने सच ही कहा है कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। अगर पूरे मन और लगन से कोई भी व्यक्ति किसी भी लक्ष्य की तरफ निरंतर बढ़ता रहे, तो लक्ष्य अवश्य ही प्राप्त होता है, फिर चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों। यहां तक कि संसाधन हों या फिर उनकी कमी हो या न भी हो। ऐसा ही कुछ करके दिखाया है तोक्यो पैराओलंपिक में खेल रहे हमारे खिलाड़ियों ने। पैराओलंपिक में खेल रहे सभी खिलाड़ी किसी न किसी प्रकार से शारीरिक रूप से कुछ चुनौतियों के साथ मैदान में हैं। लेकिन खिलाड़ियों का जोश और जज्बा काबिलेतारीफ है। खेल के मैदानों में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है।
अगर भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो सीमित संसाधनों में उन्होंने इतिहास रच कर दिखाया है। भारतीय खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि विकसित देशों की तुलना में भले हमारे पास संसाधन की कमी हो, लेकिन हिम्मत और हौसले की कमी नहीं है। इसी हिम्मत और हौसले के साथ भारतीय खिलाड़ी कुल दस पदक जीत चुके हैं, जिसमे दो स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। पैराओलंपिक खिलाड़ियों ने विश्व के सामने प्रमाणित कर दिया है अगर आपका संकल्प दृढ़ है तो विकलांगता को भी वरदान के रूप में बदला जा सकता है।
’सुनील विद्यार्थी, मेरठ, उप्र
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