मनीष कुमार जोशी
टेनिस में ग्रैंडस्लैम सबसे बड़ी प्रतियोगिता होती है। इसमें भाग लेना और जीतना हर एक खिलाड़ी की ख्वाहिश होती है। इस बार अमेरिकी ओपन में टेनिस की नई सनसनी मिली है। ब्रिटेन की एम्मा रादुकानू ने कनाडा की लीला को पराजित कर खिताब जीता। वह 53 साल में पहली बार ब्रिटेन की ओर से अमेरिकी ओपन जीतने वाली महिला खिलाड़ी बनी हैं। यही नहीं 1999 के बाद पहली बार अमेरिकी ओपन का मुकाबला दो युवा और गैर वरीय खिलाड़ियों के बीच हुआ। इससे पहले 1999 में 17 साल की सेरेना विलियम्स और 18 साल की मार्टिना हिंगिस के बीच मुकाबला हुआ था। इस बार 18 साल की एम्मा रादुकानू चैंपियन बनी हैं।
ब्रिटिश खिलाड़ी के चैंपियन बनने की घटना साधारण नहीं है। रादुकानू का चैंपियन बनना टेनिस में ताजा हवा के झोंके की तरह है। अमेरिकी ओपन में वे गैर वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थीं। वे क्वालीफाई दौड़ से मुख्य दौर में आई थीं। मुख्य दौर में उनके आने से यह कभी नहीं लगा कि 18 साल की एम्मा चैंपियन बन जाएंगी। उन्होंने मुख्य ड्रा में एक बार शुरुआत की उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने पूरी प्रतियोगिता में एक भी सेट नहीं गंवाया। फाइनल में मुकाबला लीला से था। इससे ऐसा लग रहा था की फाइनल में उन्हें कड़ी टक्कर मिलेगी। लेकिन उन्होंने फाइनल भी आसानी से जीत लिया। फाइनल के दौरान पैर में चोट लगने के बावजूद उन्होंने लीला को आसानी के साथ 6-4 6-3 से हराया।
वे हिंगिस की तरह खेलते हुए टेनिस जगत की नई रानी बन गर्इं। पूरे मुकाबले में वे कोर्ट पर बिजली की तरह चमकती रहीं। उन्होंने कलात्मक टेनिस का प्रदर्शन किया। वे आत्मविश्वास से भरी थीं। इसके साथ ही वे मारिया शारापोवा के बाद ग्रैंडस्लैम जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी हो गई हैं। इससे पहले 2004 में मारिया ने 17 साल की उम्र में विंबलडन का खिताब जीता था। रादुकानू 53 साल में अमेरिकी ओपन जीतने वाली पहली ब्रिटिश महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
रादुकानू मूल रूप से ब्रिटिश नहीं हैं। वे मूल रूप से रूमानियाई हैं। उनका जन्म टोरंटो कनाडा में हुआ। दो साल की उम्र में उनके माता-पिता ब्रिटेन में आकर बस गए। उन्होंने पांच साल की उम्र से ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। वे नंबर एक खिलाड़ी रहीं सिमोना हालेप से प्रभावित हैं। उनके खेल में भी हालेप की झलक मिलती है। वे अपने मुकाबले की शुरुआत में प्रतिद्वंदी पर हावी हो जाती हैं। अमेरिकी ओपन में उनके प्रदर्शन से यही जाहिर होता है। अमेरिकी ओपन में उन्होंने साभी मुकाबले बिना कोई सेट गवाएं जीते हैं। फाइनल भी सीधे सेटों में जीता।
फाइनल मुकाबले में संघर्षपूर्ण स्कोर देखने को मिलता है। हालांकि यहां ऐसा नहीं हुआ। रादुकानू ने बिजली की फुर्ती के साथ यहां सेट और खिताब जीत लिया। अब टेनिस में इस युवा खिलाड़ी के नाम की हवा बहेगी। उम्मीद है कि इस जीत के साथ ही टेनिस में बदलाव होगा। 1999 के बाद पहला मौका है जब युवा खिलाड़ियों के बीच खिताबी मुकाबला हुआ है। इसलिए इस बार महिला चैंपियन महत्त्वपूर्ण हैं। टेनिस की नई सनसनी की चर्चा जरूरी है क्योंकि यही न केवल खेल को युवा बनाएंगी, आने वाले समय में टेनिस जगत पर राज करेंगी।
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From: Jansatta
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