विश्व मंच पर कट्टरपंथ और उग्रवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक संयुक्त दृष्टिकोण के साथ संगठन के सभी देशों को एक साथ आने और आतंक के वित्तपोषण और सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए एक आचार संहिता तैयार करने का आग्रह किया गया है। भारत इस पर लगातार काम कर रहा है और आतंकवाद के मसले पर सबको एकजुट करने में लगा हुआ है। तालिबान के उद्भव के संदर्भ में भारत द्वारा मध्य एशिया में उदारवादी इस्लाम के महत्त्व पर भी जोर दिया गया है। भारत ने इस बात को भी चिह्नित किया है कि अगर अफगानिस्तान में विकास कार्य किए जाते हैं तो इससे मादक पदार्थ, अवैध हथियार और मानव तस्करी का अनियंत्रित प्रवाह हो सकता है। इस पर भारत भी लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि भारत के लिए सबसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा अहम है। इसके साथ ही भारत मध्य एशिया के साथ अपना संपर्क-तंत्र बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
’समराज चौहान, पूर्वी कार्बी आंग्लांग, असम
नई पारी
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने समय से दो साल पहले चुनाव कराने का जोखिम लिया था, जिसमें उनकी लिबरल पार्टी को पिछली बार की ही तरह पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला, हां 2019 की तुलना में एक सीट का इजाफा जरूर हुआ। उन्हें कुल 158 सीट मिले। जबकि बहुमत के लिए उन्हें चाहिए थीं 170 सीटें। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते वे तीसरी बार के लिए प्रधानमंत्री बन गए। मगर उन्होंने जैसा सोचा था, वैसा नहीं हो पाया। उन्हें न्यू डेमोक्रेट्स पार्टी का समर्थन लेना पड़ेगा, जिन्हें इस चुनाव में कुल पच्चीस सीटें मिली हैं। कनाडा में अल्पमत की सरकार होने के बावजूद किसी तरह की अस्थिरता की गुंजाइश फिलहाल नहीं है, क्योंकि वहां खरीद-फरोख्त या दल-बदल की राजनीति देखने को नहीं मिलती। इस कारण युवा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो आश्वस्त हो सकते हैं कि वे अगले चार वर्षों तक देश की सत्ता का संचालन आराम से कर सकेंगे। अब इसमें आम जनता की क्या जगह होगी, यह वक्त बताएगा।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर, झारखंड
नदी की राह
कितना आसान है यह कहना कि नदी का पानी बढ़ रहा है, मकान डूब रहे हैं, फसलें चौपट हो रही हैं! सारे हिचक और लिहाज को ताक पर रख दिया गया है। नदी नहीं बिगड़ रही है, बल्कि हम बढ़ रहे हैं, नदी के प्रवाह स्थल तक पहुंच गए हैं। नदी तो बस बीच बीच में चेताती है कि तुमने हमारी जमीन पर अतिक्रमण किया है और अब हद से ज्यादा बढ़ गए हो। लेकिन हम फिर भी मानने को नहीं तैयार हैं अपनी गलती और दोष नदी को देते हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ बगैर राजनीतिक नफा-नुकसान को सोचते हुए प्रदेश और देश में नदी के प्रवाह क्षेत्र के कुछ दूरी का मानक तय करके हुए अतिक्रमण को ध्वस्त करे और भविष्य के लिए एक दंडात्मक कानून बनाए, ताकि सभ्यता बचाई जा सके।
’रमेश माहेश्वरी, सुल्तानपुर, उप्र
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