Monday, September 20, 2021

अपराध के पांव

बढ़ता अपराध किसी भी राष्ट्र और समाज दोनों के लिए खतरनाक होता है। यह देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक विकास को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके अलावा, इससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों में स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

इसके अलावा, यह लोगों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भी अविश्वास पैदा करता है तो न्यायपालिका और कार्यपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है। हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रेकार्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी ने देश में अपराधों को लेकर 2020 की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में अपराध की दर में अट्ठाईस फीसद का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन में औसतन अस्सी हत्या और सत्तहत्तर बलात्कार होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे अव्वल है, वहीं राजस्थान बलात्कार के मामलों में सबसे खराब हालत में है। बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध के मामले में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है।

ये आंकड़े बताते हैं कि देश में अपराध सिर चढ़ कर बोल रहा है और सरकारों की ओर से किए जा रहे दावे बिल्कुल निराधार हैं कि सब नियंत्रण में है। देश में बढ़ते अपराधों के पीछे कुछ प्रमुख कारण यह देखने में आया है कि लोग आपसी विवाद और पुरानी रंजिश के चलते एक दूसरे को मरने पर उतर आते हैं। देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति की बेहद कमी है। पुलिस सुधारों को लेकर सरकारों का उदासीन रवैया, न्यायपालिका में सुधार की कमी और रिक्त पदों के चलते न्याय प्रणाली धीमी गति से चलती है। फिर जातिवाद के चलते झूठी शान के लिए हत्या जैसे मामले देखने को मिलते हैं। इसके अलावा, समाज में बढ़ती दहेज प्रथा की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक समय की मांग है। सरकारों को देश में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए अब नए सिरे से नीति बनाने की आवश्यकता है। एक नई सामाजिक चेतना को विकसित करना भी इस ओर सकारात्मक कदम हो सकता है।
’सौरव बुंदेला, भोपाल, मप्र

दहशत में बच्चे

अफगानिस्तान से निकाले गए मासूम बच्चों ने हमें उनके साथी और दोस्तों की स्थिति के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। मौजूदा स्थिति से अनभिज्ञ बच्चे अफगानिस्तान में भूख, आतंक और शिक्षा की कमी से पीड़ित हैं। बचपन किसी भी हाल में बचा लेना चाहिए- ऐसी बातें कहना सबका है, लेकिन जब तालिबानी सत्ता हासिल कर अफगानिस्तान में आतंक और उथल-पुथल मचा रहे हों तो यह बयान बेजान बन जाता है।

यूनिसेफ द्वारा पहले जारी की गई रिपोर्टों के अनुसार अफगानिस्तान में अनुमानित 3.7 मिलियन बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जिसमें से साठ फीसद लड़कियां हैं। अब तालिबानी शासन में स्थिति का और बदहाल होना लाजमी है। देश का भविष्य बच्चों पर निर्भर करता है और अगर वही डर, अभाव और आतंक के साए में जिए तो किस दिशा में देश का भविष्य जाएगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति बेहतर हो ऐसी कामना सभी मानवतावादी करेंगे।
’निखिल रस्तोगी, अंबाला कैंट, हरियाणा

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From: Jansatta

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