Monday, August 30, 2021

अवनि लेखरा : हौसलों को नहीं डिगा पाई रीढ़ की चोट

तोक्यो में चल रहे पैरालंपिक भारत की नई स्वर्ण सनसनी बनी हैं अवनि लेखरा। उनको 2012 में हुई एक कार दुर्घटना के बाद वीलचेयर का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि उनके पैर हिल डुल नहीं पाते थे लेकिन यह हादसा उनके और उनके परिवार के इरादों को जरा भी नहीं डिगा सका। इस दुर्घटना में अवनि की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी थी। यह चोट उनके हौसलों को नहीं डिगा पाई। उनके पिता के प्रोत्साहित करने पर उन्होंने निशानेबाजी शुरू की।

पूर्व ओलंपिक निशानेबाज सुमा शिरूर की देखरेख में वे प्रशिक्षण लेने लगीं और 10 मीटर एअर राइफल स्टैंंिडग एचएस1 में 246.6 अंक के कुल स्कोर से तोक्यो में पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वालीं भारत की पहली खिलाड़ी बन गईं। जयपुर की 19 साल की निशानेबाज ने इस दौरान पैरालंपिक का नया रेकॉर्ड भी बनाया और विश्व रेकॉर्ड की बराबरी भी की।

अभिनव बिंद्रा (भारत के पहले ओलंपिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज) की आत्मकथा ‘ए शॉट एट ग्लोरी’ पढ़ने के बाद वे प्रेरित हुईं। कोविड-19 महामारी से उनकी तोक्यो पैरालंपिक की तैयारियों पर असर पड़ा, जिसमें उनके लिए जरूरी फिजियोथेरेपी दिनचर्या सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। लेखरा ने कहा, ‘रीढ़ की हड्डी के विकार के कारण कमर के निचले हिस्से में मुझे कुछ महसूस नहीं होता लेकिन मुझे फिर भी हर दिन पैरों का व्यायाम करना होता है।’ उन्होंने कहा, ‘एक फीजियो रोज मेरे घर आकर व्यायाम में मेरी मदद करते थे और पैरों की स्ट्रेचिंग करवाते थे।

लेकिन कोविड-19 के बाद से मेरे माता-पिता व्यायाम करने में मेरी मदद करते हैं। वे जितना बेहतर कर सकते हैं, करते हैं।’ वर्ष 2015 में राइफल उठाने के बाद लेखरा ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में काफी अच्छा प्रदर्शन किया और फिर वह यात्रा शुरू हुई जिसमें उन्होंने खेल के शीर्ष स्तर पर सबसे बड़ा पुरस्कार हासिल कर इतिहास रच दिया।

विश्व रैंंकिंग में पांचवें स्थान पर काबिज लेखरा अभी तीन और स्पर्धाओं – मिश्रित एयर राइफल प्रोन, महलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशन और मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन – में हिस्सा लेंगी। स्वर्ण पदक जीतने को लेकर लेखरा ने कहा, ‘मैं यह पदक जीतकर बहुत खुश हूं। मैं इस अहसास को बयां नहीं कर सकती। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं दुनिया में शीर्ष पर हूं।’ उन्होंने कहा, मुझे आगे और स्पर्धाओं में भाग लेना है तथा और पदक जीतने हैं। मेरे अभी तीन और मुकाबले हैं और मेरा उन पर ध्यान है। अपना शत प्रतिशत दूंगी।’ उन्होंने 2017 में बैंकाक में डब्लूएसपीएस विश्व कप में कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने क्रोएशिया में 2019 में और संयुक्त अरब अमीरात में हुए अगले दो विश्व कप में इस पदक का रंग बेहतर करते हुए रजत पदक अपने नाम किए। शिरूर तोक्यो में उनके साथ ही हैं। वे ओलंपिक में भारतीय राइफल निशानेबाज दिव्यांश सिंह पंवार और ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर का मार्गदर्शन भी कर रही थीं।

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From: Jansatta

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