ताज्जुब की बात यह कि मुंबई में जिन दो हजार से ज्यादा लोगों को टीका लगा, उनका कोविन ऐप पर कोई ब्योरा ही नहीं था। न ही इन लोगों को टीकाकरण के तत्काल बाद प्रमाणपत्र दिए गए। इस पूरे मामले का पर्दाफाश भी इसी वजह से हो पाया। अब पता चला है कि टीके भी नकली थे। ऐसा भी बहुत हुआ है कि जिन लोगों ने पंजीकरण नहीं करवाया, उनके नाम से पहले ही टीके लग चुके।
From: Jansatta
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