जब हम मातृभाषा में चीजों को सीखते हैं तो वे हमारे लिए प्राथमिक होती हैं, क्योंकि इसके लिए हमारे मस्तिष्क को अनुवाद की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। इसके विपरीत जब हम मातृभाषा के अतिरिक्त अपनी द्वितीयक या तृतीयक भाषा में विचारों को ग्रहण करते हैं, तो पहले उसे अपनी मातृभाषा में बदलते हैं, फिर उसको ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि मातृभाषा में मस्तिष्क की ग्राह्यता सर्वाधिक होती है।
From: Jansatta
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